Bihar Elections 2025: निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया. राज्य की 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर वोटिंग होगी, जबकि दूसरे चरण में 11 नवंबर को शेष 122 सीटों पर. नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि कुल 7.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 14 लाख पहली बार वोट डालने वाले युवा शामिल हैं. ECI ने विशेष गहन संशोधन (SIR) के जरिए वोटर लिस्ट को शुद्ध किया है. राजनीतिक दल छठ पूजा के बाद चुनाव की मांग कर रहे थे, ताकि प्रवासी मजदूर अधिक संख्या में वोट डाल सकें. यह चुनाव बिहार की राजनीति में नितीश कुमार की सत्ता टिकाने या विपक्ष की वापसी का फैसला करेगा.
IANS-मैट्राइज सर्वे की मुख्य बातें
चुनाव तारीखों के ऐलान के साथ ही आईएएनएस-मैट्राइज न्यूज कम्युनिकेशंस का ओपिनियन पोल सामने आया है. 18 सितंबर से 5 अक्टूबर तक सभी 243 विधानसभाओं में 46,862 लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार यह सर्वे एनडीए को मजबूत स्थिति में दिखाता है. सर्वे के अनुसार, एनडीए को 49% वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जो 2020 के 37.3% से काफी ऊपर है. इससे गठबंधन को 150-160 सीटें मिल सकती हैं, जो बहुमत (122) से कहीं अधिक है. वहीं, महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) को 36% वोट शेयर के साथ 70-85 सीटें मिलने का पूर्वानुमान है. अन्य दलों को 9-12 सीटें मिल सकती हैं. मार्जिन ऑफ एरर ±3% है. यह पोल बेरोजगारी, पलायन और शासन पर जनभावना को दर्शाता है, जहां एनडीए को स्थिरता का श्रेय मिल रहा है.

एनडीए के भीतर पार्टियों का प्रदर्शन
एनडीए में भाजपा सबसे मजबूत दिख रही है. सर्वे में भाजपा को 21% वोट शेयर के साथ 80-85 सीटें मिलने का अनुमान है. जेडीयू को 18% वोट से 60-65 सीटें, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 6% वोट से 4-6 सीटें, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 3-6 सीटें और आरएलएम को 2% वोट से 1-2 सीटें मिल सकती हैं. हम को 2% वोट शेयर का अनुमान है. कुल मिलाकर, एनडीए की एकजुटता नितीश कुमार की अगुवाई में मजबूत लग रही है, जो 2005 से कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. सर्वे में 42% लोगों ने नितीश को मुख्यमंत्री पद का पसंदीदा चेहरा बताया, जबकि तेजस्वी यादव को 15% समर्थन मिला.
महागठबंधन और अन्य दलों की स्थिति
महागठबंधन को बड़ा झटका लगने का संकेत है. राजद को 21% वोट शेयर के साथ 60-65 सीटें मिलने का अनुमान है, जो 2020 की 75 सीटों से कम है. कांग्रेस को 8% वोट से 7-10 सीटें, सीपीआई(एमएल) को 4% से 6-9 सीटें, सीपीआई और सीपीएम को 1% से 0-1 सीटें, तथा विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को 2-4 सीटें मिल सकती हैं. अन्य दलों में प्रशांत किशोर की जन सुराज को 7% वोट से 2-5 सीटें, एआईएमआईएम को 1% से 1-3 सीटें, बसपा-जेएमएम को 7-10 सीटें मिलने का पूर्वानुमान है. सर्वे विपक्ष की एकता पर सवाल उठाता है, खासकर वोटर लिस्ट विवाद के बाद.
राजनीतिक निहितार्थ और विशेषज्ञ मत
यह सर्वे बिहार की ध्रुवीकृत राजनीति को उजागर करता है. 2020 में एनडीए को 125 सीटें मिली थीं, जबकि महागठबंधन को 110. अब एनडीए की बढ़त विकास योजनाओं और नितीश की स्थिरता पर आधारित लगती है, लेकिन आलोचक गठबंधन परिवर्तनों को कमजोरी मानते हैं. राष्ट्रीय नेता जैसे पीएम मोदी और राहुल गांधी की रैलियां तय हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि पोल स्नैपशॉट हैं, न कि गारंटी. बिहार में युवा मतदाताओं (14 लाख नए) और प्रवासियों का रुझान निर्णायक होगा. ECI ने 250 स्टेशनों पर घुड़सवार गश्त और 197 पर नाव से पहुंच की व्यवस्था की है. यह चुनाव भारत की राजनीतिक दिशा तय करेगा.
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