Kerala Assembly Election 2026: केरल में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव मनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा. सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदाता अपनी अगली सरकार चुनने के लिए वोट डालेंगे. चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान के लिए कड़े इंतजाम किए हैं.
कैसा है वोटरों का गणित?
इस बार केरल में मतदाताओं की संख्या में भारी उत्साह देखा जा रहा है. कुल 2.74 करोड़ (लगभग 27 लाख का आंकड़ा डेटा सुधार के साथ) पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इनमें महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, जो केरल की चुनावी परंपरा रही है. इसके अलावा 24 लाख से अधिक प्रवासी मतदाता भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे. ट्रांसजेंडर समुदाय के 273 लोग भी वोट डालेंगे.
मतदान केंद्रों पर विशेष इंतजाम
राज्य भर में कुल 30,495 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. चुनाव आयोग ने इस बार महिला सशक्तिकरण और समावेशी मतदान पर जोर दिया है. इसके तहत 352 बूथों की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के हाथों में होगी, जबकि 37 बूथों का संचालन दिव्यांग कर्मचारी करेंगे. सुरक्षा के लिए राज्य पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है, ताकि संवेदनशील इलाकों में शांति बनी रहे.

कौन कहां डालेगा वोट?
राज्य के तमाम दिग्गज नेताओं ने अपने मतदान का समय तय कर लिया है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कन्नूर में सुबह मतदान करेंगे. वहीं कांग्रेस के बड़े नेता शशि थरूर और एके एंटनी तिरुवनंतपुरम में वोट डालेंगे. केसी वेणुगोपाल अलाप्पुझा में अपना वोट देंगे. सिर्फ राजनेता ही नहीं, बल्कि ममूटी और जगदीश जैसे फिल्मी सितारे भी कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में वोट डालकर जनता को प्रेरित करेंगे.
उम्मीदवारों का लेखा-जोखा
इस बार मुख्य मुकाबला तीन गठबंधनों के बीच है. सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF), विपक्षी यूडीएफ (UDF) और बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए (NDA) मैदान में हैं. सभी 140 सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष के आसार हैं. माकपा और कांग्रेस समर्थित गठबंधनों ने सभी सीटों पर अपने मजबूत प्रत्याशी उतारे हैं, वहीं बीजेपी भी राज्य की लगभग सभी सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है.
पिछले चुनाव परिणाम और सत्ता का इतिहास
केरल में पिछले 40 सालों से हर पांच साल में सरकार बदलने का रिवाज था, जिसे 2021 में पिनाराई विजयन ने तोड़ दिया था.
- 2011: कांग्रेस नीत यूडीएफ की जीत हुई.
- 2016: वामपंथी एलडीएफ ने सत्ता में वापसी की.
- 2021: इतिहास रचते हुए एलडीएफ ने दोबारा जीत दर्ज की.
- अब 2026 में एलडीएफ ‘हैट्रिक’ लगाने की उम्मीद में है, जबकि कांग्रेस वापसी के लिए संघर्ष कर रही है.
भाजपा को क्यों है बड़ी जीत की उम्मीद?
बीजेपी इस बार केरल में पूरी ताकत झोंक रही है. पार्टी को उम्मीद है कि उनके वोट बैंक में इस बार भारी इजाफा होगा. इसके पीछे मुख्य कारण केंद्र सरकार की योजनाएं, ईसाइयों और अन्य समुदायों के बीच बढ़ती पैठ और युवा वोटरों का प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर भरोसा है. बीजेपी ने कुछ हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
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