विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने का फैसला किया है. तृणमूल विपक्षी इंडिया गठबंधन लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय में महाभियोग का नोटिस आज 2 बजे जमा करेंगे. विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद की जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया और कई मामलों में संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन किया.
सांसदों का समर्थन
महाभियोग प्रस्ताव के लिए विपक्षी दलों ने सांसदों के हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी हो गई है. बुधवार रात तक लोकसभा के 120 और राज्यसभा के 60 सांसदों के हस्ताक्षर हो चुके थे. गुरुवार रात तक यह संख्या बढ़कर लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 हो गई. इस तरह कुल 193 सांसदों ने अब तक इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं. विपक्षी नेताओं का कहना है कि कई सांसदों ने आवश्यक संख्या पूरी होने के बाद भी उत्साह के साथ हस्ताक्षर किए.
सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की लगभग सभी पार्टियों के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं. साथ ही, आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी इसमें समर्थन दिया है, भले ही वह अब औपचारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा न हो.
क्या है मुख्य आरोप?
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मुख्य रूप से तीन गंभीर आरोप लगाए हैं:
- मतदाताओं के वोट देने के अधिकार को प्रभावित करना या छीनना.
- तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान कथित दुर्व्यवहार करना.
- स्पशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में संविधान के प्रावधानों का पालन न करना.
विपक्ष चाहता है कि इस मामले की जांच संसद की एक संयुक्त समिति द्वारा की जाए, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद शामिल हों.
SIR को लेकर विवाद
विपक्ष खास तौर पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाने पर ले रहा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में बदलाव ऐसे तरीके से किए जा रहे हैं जिससे सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ मिल रहा है.
पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर भी विवाद सामने आया है. तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि इस दौरान कई असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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