पश्चिम बंगाल में सत्ता का तख्तापलट होते ही समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं. 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद राज्य में ‘बुलडोजर राजनीति’ की एंट्री (Bengal Bulldozer Action) हो चुकी है. मंगलवार की आधी रात को कोलकाता के ऐतिहासिक न्यू मार्केट में जो हुआ, उसने टीएमसी नेताओं की नींद उड़ा दी है.
वहीं, मुख्यमंत्री की कुर्सी हाथ से जाते ही टीएमसी के नंबर-2 कहे जाने वाले अभिषेक बनर्जी के आवास ‘शांतिनिकेतन’ से सुरक्षा हटा ली गई है. बंगाल की फिजां में अब ‘बदले हुए बदले’ की गूंज साफ सुनाई दे रही है.
न्यू मार्केट में टीएमसी दफ्तर ‘धराशायी'(Bengal Bulldozer Action)
कोलकाता का सबसे व्यस्त इलाका ‘न्यू मार्केट’ मंगलवार रात रणक्षेत्र में बदल गया. भारी शोर के बीच अचानक बुलडोजर पहुँचा और टीएमसी यूनियन के कार्यालय को जमींदोज करना शुरू कर दिया. देखते ही देखते ऐतिहासिक हॉग मार्केट इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
वहीं व्यापारियों ने डर के मारे शटर गिरा दिए. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्यालय एक अवैध ढांचे पर बना था जिसे जबरन कब्जा कर बनाया गया था, जबकि टीएमसी ने इसे ‘बीजेपी की गुंडागर्दी’ करार दिया है.
अभिषेक के ‘शांतिनिकेतन’ से सुरक्षा गायब
कोलकाता स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास ‘शांतिनिकेतन’ के बाहर जो सुरक्षा का घेरा हमेशा रहता था, वह अब हटा लिया गया है. सत्ता जाने के 48 घंटों के भीतर सुरक्षा में कटौती को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है. प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन जानकारों का मानना है कि नई व्यवस्था में अब टीएमसी नेताओं को मिलने वाली ‘एक्स्ट्रा’ सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है.
महुआ मोइत्रा ने कैसे कसा तंज? (Mahua Moitra on Bulldozer Action)
इस कार्रवाई पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया (X) पर वीडियो शेयर करते हुए तीखा हमला किया. उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि कोलकाता का ऐतिहासिक न्यू मार्केट. बंगाली ‘परिवर्तन’ का जश्न मना रहे हैं. वहीं, डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि प्रशासन और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में बुलडोजर लाकर दफ्तर तोड़ा गया. टीएमसी ने इसे सीधे तौर पर केंद्र सरकार के शह पर की गई कार्रवाई बताया है.
सिंडिकेट और अवैध कब्जे पर प्रहार?
भाजपा समर्थकों और कुछ स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक पार्टी पर हमला नहीं, बल्कि बंगाल को ‘सिंडिकेट राज’ और ‘अवैध कब्जों’ से मुक्त कराने की शुरुआत है. उनका दावा है कि जिस दफ्तर को तोड़ा गया, वह पहले एक गरीब दुकानदार की जगह थी जिसे टीएमसी नेताओं ने धौंस दिखाकर छीन लिया था. अब सत्ता बदलते ही दुकानदार ने अपना हक वापस लेने की हिम्मत दिखाई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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