West Bengal Power Shift: पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे अभी पूरी तरह साफ भी नहीं हुए हैं, लेकिन राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिलता स्पष्ट बहुमत देख अब प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है. राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने सभी विभागीय सचिवों को एक बेहद सख्त और लिखित आदेश जारी किया है, जिसने राज्य में सत्ता के बदलते मिजाज को साफ कर दिया है.
IAS दुष्यंत नारियाला का ‘कड़ा’ रुख
पश्चिम बंगाल कैडर के 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला, जो मार्च 2026 से मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इस समय चुनाव आयोग और प्रशासन के बीच की सबसे अहम कड़ी हैं. उन्होंने सभी विभागों के सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि उनके कार्यालय की कोई भी महत्वपूर्ण फाइल या कागजात नष्ट नहीं होने चाहिए.
मुख्य सचिव के आदेश की बड़ी बातें
- सुरक्षा की गारंटी: किसी भी महत्वपूर्ण फाइल या कागज को कार्यालय से हटाया, क्षतिग्रस्त या बाहर नहीं ले जाया जाना चाहिए.
- अवैध कॉपी पर रोक: फाइलों और आधिकारिक दस्तावेजों का अवैध तरीके से फोटोस्टेट या स्कैन करना पूरी तरह प्रतिबंधित है.
- व्यक्तिगत जिम्मेदारी: सभी विभाग प्रमुख और सचिव व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि फाइलों से जुड़ी कम्युनिकेशंस सुरक्षित रहें.
- लापरवाही का अंजाम: आदेश में साफ कहा गया है कि यदि किसी फाइल के साथ छेड़छाड़ होती है, तो संबंधित सचिव को निजी तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
क्यों उठाया गया ये बड़ा कदम?
यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी रैलियों में बार-बार यह वादा किया था कि बीजेपी की सरकार बनते ही टीएमसी शासन के दौरान हुए कथित घोटालों की गहन जांच कराई जाएगी. अक्सर देखा गया है कि सत्ता बदलने के दौरान पिछली सरकार के ‘राज’ छिपाने के लिए फाइलों को गायब या नष्ट कर दिया जाता है. मुख्य सचिव ने समय रहते यह आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि नई व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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