Bageshwar Dham Mahabharat Actors Speech: संगम नगरी में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा में उस वक्त रोमांच चरम पर पहुँच गया, जब मंच पर 90 के दशक की ‘महाभारत’ के दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आए. शो में युधिष्ठिर (गजेंद्र चौहान) और दुर्योधन (पुनीत इस्सर) का किरदार निभाने वाले अभिनेताओं ने मंच से अपने ‘फायर’ बयानों (Mahabharat Actors Speech) के जरिए उपस्थित जनसैलाब में जोश भर दिया. दोनों ही कलाकारों ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित करनी चाहिए.
‘शास्त्र के साथ शस्त्र और स्वास्थ्य भी जरूरी’: पुनीत इस्सर (दुर्योधन)
परदे पर ‘दुर्योधन’ के रूप में अपनी धाक जमाने वाले पुनीत इस्सर ने सभा में मौजूद माताओं-बहनों को सीधे तौर पर सतर्क रहने की चेतावनी दी. उन्होंने अपील की कि हिंदू समाज जाग गया है और अब बच्चों को सनातन धर्म की शिक्षा देना अनिवार्य है.
इसके साथ ही पुनीत ने जबरन धर्म परिवर्तन और बहू-बेटियों को बहलाने-फुसलाने जैसी घटनाओं पर चिंता जताई और लोगों को इससे बचने की सलाह देते हुए कहा कि केवल शास्त्र ज्ञान काफी नहीं है, ‘शस्त्र विद्या’ भी जरूरी है. पुनीत ने युवाओं को नियमित व्यायाम और शारीरिक मजबूती पर भी जोर दिया ताकि वे धर्म की रक्षा कर सकें.
‘राष्ट्र से बड़ी कोई प्रतिज्ञा नहीं’: गजेंद्र चौहान (युधिष्ठिर)
मंच से अपनी बात (Mahabharat Actors Speech) रखते हुए गजेंद्र चौहान, जो युधिष्ठिर के किरदार के लिए घर-घर में जाने जाते हैं, काफी आक्रामक नजर आए. उन्होंने धर्म विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि गजेंद्र ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग धर्म के विरोध में काम कर रहे हैं, उनका ‘सत्यानाश’ होना तय है.
उन्होंने महाभारत की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र बनाने के संकल्प में कोई भी पिता, पुत्र, परिवार या व्यक्तिगत प्रतिज्ञा ‘राष्ट्र’ से ऊपर नहीं हो सकती. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के हित के लिए पुरानी बेड़ियों को तोड़ना ही होगा.
धीरेंद्र शास्त्री के मंच से बदली सियासी हवा?
धीरेंद्र शास्त्री, जो खुद ‘हिंदू राष्ट्र’ के मुखर समर्थक रहे हैं, उनके मंच पर इन कलाकारों की मौजूदगी ने इस एजेंडे को और धार दे दी है. हाल ही में शिवाजी महाराज पर उनके बयान को लेकर हुए विवाद के बाद, महाभारत की इस ‘कास्ट’ का समर्थन मिलना उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी जीत की तरह देखा जा रहा है. प्रयागराज की इस सभा ने साफ कर दिया है कि बागेश्वर धाम का मंच अब केवल कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और वैचारिक क्रांति का केंद्र बनता जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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