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बांग्लादेश के उदय से लेकर NSG के गठन तक… पर्दे के पीछे के इन गुमनाम नायकों की कहानी ला रहे हैं धर्म प्रोडक्शंस

धर्म प्रोडक्शंस और लियो मीडिया कलेक्टिव ने देश की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (R&AW) के संस्थापक रामेश्वर नाथ काव के जीवन पर आधारित एक बड़े बजट की फिल्म की घोषणा की है.

भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (R&AW) के संस्थापकों और देश के असली गुमनाम नायकों की कहानियां अब सिल्वर स्क्रीन पर धूम मचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. फिल्म निर्माण की दुनिया के जाने-माने नाम, धर्म प्रोडक्शंस और लियो मीडिया कलेक्टिव ने मिलकर एक बहुत ही रोमांचक प्रोजेक्ट का ऐलान किया है. यह घोषणा आर एंड एडब्ल्यू (R&AW) के स्थापना वर्ष से जुड़ी है. यह है कि इस बहुप्रतीक्षित फिल्म की सिनेमाघरों में रिलीज 11 अगस्त 2028 को स्वतंत्रता दिवस के लंबे वीकेंड पर होगी, जो एजेंसी के 60 साल पूरे होने का जश्न भी होगा.

किताबों के पन्नों से बड़े पर्दे तक का सफर

यह फिल्म किसी काल्पनिक कहानी पर आधारित नहीं है, बल्कि यह लेखक नितिन ए. गोखले की चर्चित किताब ‘जेंटलमैन स्पाईमास्टर’ (Gentleman Spymaster) के पन्नों से प्रेरित है. फिल्म की पटकथा मुख्य रूप से साल 1955 से 1971 के बीच के उस दौर को बयां करेगी, जब देश को एक मजबूत बाहरी खुफिया एजेंसी की सख्त जरूरत महसूस हुई, फिर उसकी नींव पड़ी और आखिरकार 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में एजेंसी ने अपनी पहली ऐतिहासिक भूमिका निभाई.

भले ही फिल्म के निर्देशक और पूरी स्टार कास्ट के नाम अभी पर्दे के पीछे रखे गए हैं, लेकिन फिल्मी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि किसी बड़े ए-लिस्ट अभिनेता को मुख्य भूमिका में देखा जा सकता है. इस साल के मध्य तक इसकी शूटिंग शुरू होने की पूरी योजना है. आपको बता दें कि इससे पहले धर्म और लियो मीडिया की जोड़ी ‘बैड न्यूज’ और ‘केसरी: चैप्टर 2’ जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुकी है.

कौन थे रामेश्वर नाथ काव?

जब भी देश की सुरक्षा की बात आती है, तो रामेश्वर नाथ काव (आर.एन. काव) का नाम सबसे ऊपर सम्मान के साथ लिया जाता है. 10 मई 1918 को वाराणसी के एक कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे काव साहब की शिक्षा लखनऊ और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हुई थी. साल 1940 में सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद वे इंडियन इंपीरियल पुलिस से जुड़े और आज़ादी के आसपास इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का हिस्सा बन गए.

प्रधानमंत्री की सुरक्षा और विदेश यात्राएं: काव साहब ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की व्यक्तिगत सुरक्षा की जिम्मेदारी बखूबी संभाली. इसके अलावा, 1955 में एयर इंडिया के चर्चित ‘कश्मीर प्रिंसेस’ हादसे की जांच में भी उनका अहम योगदान था.

  • ‘रॉ’ की स्थापना: 1962 के चीन युद्ध और 1965 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान बाहरी खुफिया तंत्र में कुछ कमियां महसूस हुईं. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1968 में आईबी से अलग करके स्वतंत्र ‘रॉ’ (R&AW) की स्थापना की और आर.एन. काव को इसका पहला प्रमुख बनाया. उनके द्वारा चुने गए खास अफसरों को प्यार से ‘काउ बॉयज’ कहा जाता था.
  • बांग्लादेश का जन्म: 1971 के युद्ध में काव और उनकी एजेंसी ने जो रणनीति बनाई, उसने इतिहास बदल दिया. मुक्ति वाहिनी को ट्रेनिंग देने से लेकर हर संभव खुफिया मदद तक, उनके योगदान के चलते ही बांग्लादेश का उदय संभव हो पाया. यही वजह है कि उन्हें कई बार ‘आर्किटेक्ट ऑफ बांग्लादेश’ भी कहा जाता है. इसके अलावा सिक्किम का भारत में विलय और देश के सुरक्षा बल ‘एनएसजी’ (NSG) की स्थापना के पीछे भी उनका ही दिमाग था.

पर्दे के पीछे के असली नायक को सच्ची श्रद्धांजलि

भारतीय सिनेमा में ‘राज़ी’, ‘शेरशाह’ और ‘केसरी’ जैसी सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्मों को दर्शकों ने हमेशा से खूब प्यार दिया है. लेकिन आर.एन. काव की कहानी इन सबसे बिल्कुल अलग है. यह एक ऐसे शख्स की दास्तान है जिसने न केवल एक मजबूत संस्था खड़ी की और देश के लिए बड़ी रणनीतियां बनाईं, बल्कि खुद हमेशा लाइमलाइट और कैमरों से कोसों दूर रहे.

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-भारत एक्सप्रेस



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