Bengal Files Film Controversy: बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री की आगामी फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ 5 सितंबर को रिलीज होने वाली है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसे लेकर भारी विरोध हो रहा है. विवेक अग्निहोत्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपील की है कि फिल्म को बैन न किया जाए. उन्होंने कहा कि फिल्म दुनिया भर में रिलीज होगी, लेकिन बंगाल में राजनीतिक दबाव के कारण थिएटर मालिक डर रहे हैं. अग्निहोत्री ने बताया कि 16 अगस्त को ट्रेलर लॉन्च के दौरान सिनेमाघरों में इसे दिखाने से रोका गया और होटल में आयोजन पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया. उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ता लगातार फिल्म को बैन करने की मांग कर रहे हैं और उनके खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कराई गई हैं. अग्निहोत्री ने ममता बनर्जी से व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर फिल्म को शांतिपूर्वक रिलीज होने देने की गुजारिश की.
विवेक अग्निहोत्री ने संविधान का दिया हवाला
वीडियो में विवेक अग्निहोत्री ने भारत के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी की जिम्मेदारी है कि वे इस अधिकार की रक्षा करें. उन्होंने याद दिलाया कि फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास कर दिया है, इसलिए इसे रिलीज करना राज्य सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है. अग्निहोत्री ने सवाल उठाया कि अगर सेंसर बोर्ड ने अनुमति दे दी है, तो राजनीतिक दबाव क्यों डाला जा रहा है? उनका मानना है कि यह फिल्म किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन ताकतों के खिलाफ है जिन्होंने इंसानियत को नुकसान पहुंचाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्म नफरत नहीं फैलाती, बल्कि सत्य और हीलिंग का संदेश देती है. अग्निहोत्री ने ममता बनर्जी से हाथ जोड़कर अपील की कि फिल्म को देखें, समझें, डिबेट करें, लेकिन सच्चाई को छुपाएं नहीं.
बंगाल में हिंदुओं को दिए गए दर्द का जिक्र
विवेक अग्निहोत्री ने अपने संदेश में भारत के इतिहास पर गहन टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि भारत ने 1200 वर्षों तक गुलामी और अत्याचार झेले हैं, जिसमें हमारी संस्कृति, धर्म और कला पर हमले हुए. विशेष रूप से बंगाल का इतिहास सबसे दर्दनाक है, जहां डायरेक्ट एक्शन डे और नोआखली नरसंहार जैसे भयानक घटनाएं हुईं. उनका दावा है कि अगर ये घटनाएं न होतीं, तो शायद भारत का विभाजन भी न होता. अग्निहोत्री ने सवाल किया कि जब दुनिया भर में होलोकॉस्ट, गुलामी और हिरोशिमा-नागासाकी की त्रासदियों के बारे में हर बच्चा जानता है, तो भारतीय बच्चों को बंगाल की पीड़ा से क्यों अनजान रखा जाता है? उन्होंने पूछा कि क्या इस दर्दनाक इतिहास पर फिल्म बनाना गुनाह है? अग्निहोत्री ने जोर दिया कि हिंदुओं का पूरे विश्व में एकमात्र राष्ट्र भारत है, तो क्या वे अपने ही घर में अपनी पीड़ा की बात नहीं कर सकते? बंगाल का सच भारत का सच है, और अगर डायरेक्ट एक्शन डे व नोआखली की कहानी हम नहीं बोलेंगे, तो कौन बोलेगा?
सत्य से डर लगता, तो आईना नहीं तोड़ा जाता
वीडियो के अंत में विवेक अग्निहोत्री ने भावुक अपील की. उन्होंने कहा कि अगर सत्य से डर लगता है, तो आईना नहीं तोड़ा जाता, क्योंकि आईना तोड़ने से चेहरा नहीं बदलता. फिर भी, अगर हिंदू हिस्ट्री और हिंदू जेनोसाइड का सच बोलना भारत में गुनाह है, तो हां, वे गुनहगार हैं. अग्निहोत्री ने खुद को ‘वी द पीपल’ का एक साधारण सदस्य बताते हुए कहा कि सरकार जो चाहे, उन्हें सजा दे सकती है. उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के साथ अपना संदेश समाप्त किया. फिल्म रिलीज से पहले ही कोलकाता में ट्रेलर लॉन्च के दौरान हंगामा हुआ और इसे रोका गया. अग्निहोत्री का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इतिहास की सच्चाई पर बहस कर रहे हैं.
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