नेपाल में 26 अगस्त को आए भयानक बाढ़ के कारण वहां जीवन बिल्कुल अस्त व्यस्त हो रखा है. इस बाढ़ ने पूरे देश को प्रभावित कर दिया है, जिसमें 17000 बच्चे भी शामिल है.
सोशल मीडिया पर नेपाल बाढ़ के अनगिनत वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. इसी बीच कई बेहद संवेदनशील और भावुक वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें कुछ बच्चे बिलख-बिलखकर रो रहे है. बताया जा रहा है कि यह वीडियो नेपाल का है. लेकिन इन वीडियोज की असल सच्चाई कुछ और ही है.
क्या है वायरल वीडियो और उसकी सच्चाई?
दरअसल, सड़क पर बहते मटमैले पानी के बीच खंबे से चिपकी बिलखती बच्ची और मलबे के बीच रोती दूसरी बच्ची का वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है. जांच में सामने आया कि ये दोनों ही वीडियो एआई-जेनरेटेडहैं. एआई डिटेक्शन टूल ने इन दोनों वीडियो के फेक होने की 96 से 99 प्रतिशत तक पुष्टि की है. ध्यान से देखने पर बच्ची के चेहरे के किनारे और बाल गायब होते दिखते हैं.
गीली मिट्टी में पड़े दो बदहवास बच्चों का वीडियो भी नेपाल का बताकर वायरल किया गया. जब इसके कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च किया गया, तो यह वीडियो 2 अगस्त 2025 का निकला. यह एक वियतनामी यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था, जिसका नेपाल की बाढ़ से कोई लेना-देना नहीं है.
वहीं, बाढ़ के तेज बहाव में एक मासूम बच्चे को रस्सी के सहारे बचाते हुए लोगों का वीडियो भी खूब देखा जा रहा है. जांच में पता चला कि यह घटना 26 जुलाई 2026 की है और यह गुजरात के वलसाड जिले के टिंभी गांव का वीडियो है, जहां स्थानीय युवाओं ने बच्ची की जान बचाई थी.
इस जांच से यह साफ है कि नेपाल त्रासदी की आड़ में सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज बटोरने के लिए पुराने और एआई से बने फर्जी वीडियो फैलाए जा रहे हैं. बिना पड़ताल किसी भी भावुक वीडियो को शेयर न करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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