सोशल मीडिया पर ‘ब्रिक्स’ (BRICS) संगठन को लेकर पिछले कुछ दिनों से एक अजीबोगरीब और भ्रामक चर्चा चल रही है. दावा किया जा रहा था कि भारत को इस ताकतवर समूह से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है और उसकी जगह पाकिस्तान या तुर्की को शामिल किया जाएगा. अगर आपने भी ऐसी किसी पोस्ट पर भरोसा कर लिया है, तो संभल जाइए. विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट कर दिया है कि ये सारी बातें न केवल झूठी हैं, बल्कि पूरी तरह बेबुनियाद भी हैं.
MEA का ‘फेक न्यूज अलर्ट’
विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट चेक यूनिट ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक ‘फेक न्यूज अलर्ट’ जारी किया. मंत्रालय ने उन वायरल स्क्रीनशॉट्स को साझा किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि ‘ब्रिक्स भारत को बाहर निकाल देगा’ और ‘पाकिस्तान’ उसकी जगह लेगा.
Fake News Alert!
Please stay alert against such false and baseless claims and posts on social media. pic.twitter.com/iw8fvClgZd
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) April 29, 2026
इन सभी पोस्ट पर बड़े अक्षरों में ‘फेक’ लिखकर मंत्रालय ने साफ कर दिया कि भारत की भूमिका संगठन में पहले जैसी ही मजबूत और सक्रिय है.
मई में दिल्ली में होगी बड़ी बैठक
हकीकत तो ये है कि भारत अगले महीने यानी मई में ही नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करने जा रहा है. ये बैठक इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि भारत इस समूह का एक अनिवार्य हिस्सा है.
इस बैठक की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने खुद भारत दौरे की पुष्टि की है. वे 14 और 15 मई को दिल्ली में होने वाली इस बैठक में शिरकत करेंगे. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने मॉस्को में बताया कि लावरोव न केवल बैठक में हिस्सा लेंगे, बल्कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे.
द्विपक्षीय संबंधों और शिखर सम्मेलन की तैयारी
इस दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी. भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो व्यापार, विज्ञान और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में काम करता है. साथ ही, दोनों देश आपसी हित के वैश्विक मुद्दों और अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बात करेंगे.
सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रूपरेखा भी इसी बैठक के दौरान तैयार की जाएगी. वहीं, रूसी प्रवक्ता ने ये भी संकेत दिया कि कुछ सत्रों में ब्रिक्स के साझेदार देशों के विदेश मंत्री भी शामिल हो सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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