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सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की दुनिया में मची खलबली: क्या वाकई आ गया ‘नेशनल क्रिएटर इकोनॉमी बिल’?

सोशल मीडिया पर वायरल दावा कि राज्यसभा ने यूट्यूबर्स और इन्फ्लुएंसर्स के लिए ‘नेशनल क्रिएटर इकोनॉमी बिल 2026’ पास कर दिया है, पूरी तरह फर्जी है. संसद के रिकॉर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर इस नाम के किसी भी बिल का कोई अस्तित्व नहीं है.

Fact Check Did Rajya Sabha pass National Creator Economy Bill 2026 Truth behind viral claim

आज के दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने हर हाथ में एक कैमरा और हर घर में एक ‘इंफ्लुएंसर’ पैदा कर दिया है. सुबह की रील से लेकर रात के व्लॉग तक, यूट्यूबर्स और डिजिटल क्रिएटर्स हमारी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन सोचिए, अगर आपसे कोई कहे कि अब आपकी इस ‘क्रिएटर लाइफ’ को एक वर्किंग प्रोफेशन का दर्जा मिल गया है और आपके लिए एक खास बजट भी तैयार है, तो जाहिर है आप खुशी से झूम उठेंगे. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी ही खबर आग की तरह फैल रही है कि राज्यसभा ने ‘नेशनल क्रिएटर इकोनॉमी बिल 2026’ पास कर दिया है.

लेकिन क्या यह खबर वाकई आपके करियर को नई उड़ान देने वाली है या इसकी सच्चाई कुछ और ही है. आइए जानते हैं हकीकत.

वायरल पोस्ट्स ने उड़ाई क्रिएटर्स की नींद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे X (ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कई ऐसी पोस्ट शेयर की जा रही हैं, जिनमें दावा किया गया है कि इस बिल के जरिए यूट्यूबर्स और इन्फ्लुएंसर्स को आधिकारिक तौर पर ‘प्रोफेशनल’ मान लिया गया है.

वायरल दावों में कहा गया कि अब एक ‘क्रिएटर वेलफेयर फंड’ बनेगा, क्रिएटर्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और यहाँ तक कि AI कंटेंट और पेड प्रमोशन के लिए कड़े नियम लागू होंगे.

फैक्ट चेक में सच आया सामने?

जब इस सनसनीखेज दावे की पड़ताल की गई, तो तस्वीर बिल्कुल उलट निकली. आधिकारिक स्रोतों और डिजिटल संसद (Digital Sansad) पोर्टल की जांच करने पर पता चला कि ‘नेशनल क्रिएटर इकोनॉमी बिल 2026’ नाम का कोई भी विधेयक न तो संसद में पेश किया गया है और न ही पारित हुआ है. राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ऐसे किसी बिल का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.

भ्रम फैलने की असली वजह

साल 2026 के संसदीय सत्र के दौरान ‘जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026’ और ‘डिजिटल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म्स बिल 2026’ जैसे कुछ वास्तविक विधेयक जरूर चर्चा में रहे. शरारती तत्वों ने इन्हीं असली नामों के साथ इस फर्जी बिल का नाम जोड़ दिया ताकि ये दावा लोगों को विश्वसनीय लगे.

जागरूक रहें, सुरक्षित रहें

इसलिए ऐसे किसी भी दावो पर बिना पुष्टि के विश्वास न करें, विशेषकर डिजिटल क्रिएटर्स पर, जिनका काम ही सूचनाएं फैलाना है, उनके द्वारा बताई गई किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि जरूर करें. किसी भी खबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें; सतर्क रहें और केवल प्रमाणित जानकारी को ही सच मानें.

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-भारत एक्सप्रेस



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