आजकल सोशल मीडिया का दौर है और यहां खबरें बिजली की रफ्तार से फैलती हैं. हाल ही में एक ऐसी ही सनसनीखेज पोस्ट इंटरनेट पर छाई हुई है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भारत के सामने ‘रामराज्य’ घोषित करने की शर्त रखी है. इतना ही नहीं, पोस्ट में ये भी कहा जा रहा है कि उन्होंने नेपाल की तमाम मस्जिदों और ईदगाहों को गिराने का फरमान सुना दिया है. लेकिन क्या ये वाकई में सच है, आइए जानते है.
क्या है वायरल दावा?
दरअसल, इंस्टाग्राम के एक यूजर ने एक पोस्ट शेयर की, जो देखते ही देखते वायरल हो गई. इस पोस्ट में बालेन्द्र शाह के हवाले से लिखा गया था कि वो भारत सरकार से तभी हाथ मिलाएंगे जब भारत खुद को ‘रामराज्य’ घोषित करेगा.

साथ ही, इसमें ये भी दावा किया गया कि नेपाल को ‘जिहादी मानसिकता’ से मुक्त करने के लिए सभी धार्मिक स्थलों जैसे मस्जिद और दरगाहों को ध्वस्त करने का आदेश दे दिया गया है. वहीं, पोस्ट में नेपाल को एक शुद्ध हिंदू राष्ट्र के रूप में पेश किया गया.
पड़ताल में सच आया सामने
जब इस खबर की गहराई से जांच की गई, तो सच्चाई कुछ और ही निकली. आधिकारिक रिकॉर्ड्स और मीडिया रिपोर्ट्स खंगालने पर पता चला कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने ऐसा कोई भी बयान कभी नहीं दिया है. बालेन्द्र शाह के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी ऐसी कोई पोस्ट मौजूद नहीं है.
असल में, बालेन्द्र शाह ने मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते के बाद से अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर कोई सक्रियता नहीं दिखाई है. इसके अलावा, नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी भारत के साथ संबंधों को लेकर जो भी आधिकारिक बयान आए हैं, उनमें आपसी सहयोग और विकास की बातें कही गई हैं, न कि किसी भी तरह की धार्मिक या विवादास्पद शर्त की.
भारत और नेपाल के संबंध
27 मार्च 2026 को जब बालेन्द्र शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री का पदभार संभाला, तब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी थी. इसके जवाब में बालेन्द्र शाह ने भी पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की इच्छा जताई.
हाल ही में आए एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री शिशिर खनाल के हवाले से बताया गया है कि पीएम मोदी ने बालेन्द्र शाह को भारत आने का न्योता दिया है. इस यात्रा की तैयारियां चल रही हैं और दोनों पक्ष तकनीकी स्तर पर काम कर रहे हैं ताकि ये दौरा सकारात्मक रहे. कहीं भी रामराज्य या धार्मिक स्थलों को गिराने जैसी किसी शर्त का कोई जिक्र तक नहीं है.
क्या कहता है नेपाल का संविधान?
जहां तक नेपाल को ‘हिंदू राष्ट्र’ कहने और अन्य धर्मों के स्थलों को गिराने की बात है, तो ये नेपाल के वर्तमान संविधान के खिलाफ है. नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार, नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य है. वहां की सरकार सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है.
इस जांच से ये साफ हो जाता है कि वायरल पोस्ट से किया जा रहा दावा भ्रामक और झूठा है. बालेंद्र शाह ने न तो भारत के सामने कोई ऐसी शर्त रखी है और न ही नेपाल में किसी धार्मिक स्थल को गिराने का आदेश दिया है. इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे किसी भी दावे पर बिना किसी पुष्टि या विश्वसनीय स्रोत के भरोसा न करें ऐर न ही आगे किसी को शेयर करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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