Fact Check: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें कहा जा रहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए छह सैनिकों को हाल ही में पहली बार आधिकारिक मान्यता दी गई है और उनका बलिदान अब जाकर सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया है. इस दावे के बाद कई लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी देखने को मिल रही हैं. तो चलिए इस खबर के जरिए आपको वायरल हो रहे दावे की सच्चाई बताते हैं.
सच्चाई क्या है?
जांच में सामने आया है कि यह दावा भ्रामक है. रक्षा बलों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन वीर जवानों को न तो हाल ही में पहली बार सम्मान दिया गया है और न ही उनके बलिदान को देर से मान्यता मिली है. सच यह है कि उनका सम्मान और श्रद्धांजलि पहले ही समय पर औपचारिक रूप से दी जा चुकी थी.
पहले ही हो चुका है आधिकारिक सम्मान
रक्षा बलों के मुताबिक, 11 मई 2025 को आयोजित एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शहीदों को सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी थी. इसी दौरान उनके सर्वोच्च बलिदान को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया था.
इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में भी स्पष्ट रूप से बताया गया था कि इन सैनिकों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए हैं. यह पूरी प्रक्रिया सेना की स्थापित परंपराओं और तय प्रोटोकॉल के अनुसार की गई थी.
सोशल मीडिया पर पहले भी दी गई थी श्रद्धांजलि
भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी समय रहते इन शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी. यानी यह कहना कि उनका सम्मान या पहचान हाल ही में पहली बार सामने आई है, तथ्यों के विपरीत है.
इसके बाद भी अलग-अलग अवसरों पर शहीदों को सम्मानित किया गया. सबसे पहले 8 अक्टूबर 2025 को वायु सेना प्रमुख की मौजूदगी में आयोजित समारोह में वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए. जिसके बाद 15 जनवरी 2026 को सेना दिवस परेड के दौरान तीन शहीदों के परिवारों को सेना मेडल (वीरता) दिया गया.
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वॉर मेमोरियल पर नाम दर्ज करने की प्रक्रिया
नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीदों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया एक तय और संवेदनशील प्रोटोकॉल के तहत होती है. रक्षा बलों के अनुसार इसमें सभी औपचारिकताओं और नियमों का पूरी गंभीरता और सम्मान के साथ पालन किया जाता है. इसलिए इस प्रक्रिया पर सवाल उठाना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है.
बता दें कि यह साफ है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शहीदों को लेकर किया जा रहा दावा गलत और भ्रामक है. उन्हें समय पर ही आधिकारिक श्रद्धांजलि, वीरता पुरस्कार और सम्मान प्रदान किया जा चुका है. रक्षा बलों ने भी लोगों से अपील की है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना पुष्टि के जानकारी साझा न करें, ताकि शहीद परिवारों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और गलत सूचना न फैले.
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-भारत एक्सप्रेस
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