18th BRICS Summit 2026: राजधानी दिल्ली का भारत मंडपम 12-13 सितंबर को दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंचों में से एक बनने जा रहा है. भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी के लिए नई दिल्ली पूरी तरह तैयार है.
इस बार सम्मेलन की मुख्य थीम ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करना, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), जलवायु परिवर्तन, हरित वित्त और वैश्विक संस्थाओं में बहुपक्षीय सुधार लाना है. लेकिन इन सब एजेंडों के बीच पूरी दुनिया की नजरें एक खास मुलाकात पर टिकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बैठक.
गलवान की खटास के बाद पिघल रही बर्फ?
2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद से भारत और चीन के रिश्ते अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. हालांकि, लगातार सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद अक्टूबर 2024 (कजान) और अगस्त 2025 (तियानजिन) में दोनों नेताओं के बीच बातचीत से बर्फ पिघलनी शुरू हुई थी.
हाल ही में अगस्त 2026 में एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने दिल्ली में दोनों राष्ट्राध्यक्षों की संभावित मुलाकात का रोडमैप तैयार कर दिया है.
3 मुद्दों पर रहेंगी दुनिया की नजरें?
सीमा विवाद (LAC पर शांति): भारत का साफ रुख है कि जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्ण शांति स्थापित नहीं होती, रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते.
व्यापार और डेटा सुरक्षा: आर्थिक रिश्तों के बीच भारत अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है. हाल ही में UPI को चीन के Alipay+ नेटवर्क से जोड़ने के प्रस्ताव पर डेटा सुरक्षा चिंताओं के कारण भारत का कड़ा रुख रहा है.
बदलती वैश्विक व्यवस्था: रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बीच दोनों देश अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Multi-alignment) बनाए रखना चाहते हैं.
दोस्ती नहीं, ‘स्थिरता’ की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात से भारत-चीन संबंधों का तुरंत ‘रीसेट’ होना मुश्किल है, लेकिन यह वार्ता टकराव को रोकने में अहम साबित होगी. कूटनीति में हर बड़ा समाधान संवाद से ही निकलता है.
भारत और चीन आज दोस्ती की तलाश में नहीं, बल्कि अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं और रणनीतिक हितों के लिए सीमा पर स्थिरता की जरूरत में एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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