5th Himalayan Indian Ocean Region Summit: दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में आयोजित 5वें हिमालय हिंद महासागर राष्ट्र समूह (HHRS) के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आज शानदार शुभारंभ हुआ. इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है. सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, और इसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख विद्वानों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए.
सामाजिक परिवर्तन और कल्याण पर जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के मुख्य संरक्षक डॉ. इंद्रेश कुमार ने उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए ज्ञान और विज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण उसका चरित्र है. उन्होंने बताया कि भारत का प्राचीन समाज हमेशा संस्कृति और मूल्यों को महत्व देता रहा है, और यह उसकी सामाजिक दृष्टिकोण का मूल आधार है. डॉ. कुमार ने मानवता की सर्वोच्च सीमा को “दूसरों के लिए जीना और उनकी सेवा करना” बताया और कहा कि भारत अहिंसा को परम धर्म मानने वाला देश है, जो हमेशा समाज के कल्याण के लिए काम करता रहा है और आगे भी करता रहेगा.

भारतीय संस्कृति का वैश्विक दृष्टिकोण
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ ने अपने अध्यक्षीय भाषण में भारतीय संस्कृति और दर्शन पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों जैसे ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का उल्लेख किया, जो सामाजिक सौहार्द्र और वैश्विक एकता के प्रतीक हैं. प्रो. आसिफ ने यह भी कहा कि भारत में विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान किया जाता है, और यह विविधता भारत की एकता का आधार है.
राजनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी
सम्मेलन में भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने भारत की तेजी से प्रगति और वैश्विक मंच पर उसकी मजबूत उपस्थिति पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब अंतर्राष्ट्रीय मामलों में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है. इसके साथ ही, उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की सलाह को प्राथमिकता मिलने की बात भी कही.

शोध और विचार विमर्श का दौर
सम्मेलन के पहले दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. पहले सत्र का विषय था ‘भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच ऐतिहासिक संपर्क’ और दूसरे सत्र में ‘भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सांस्कृतिक संपर्क’ पर चर्चा की गई. इन सत्रों में विभिन्न देशों के शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने 32 शोध पत्र प्रस्तुत किए. सत्रों में भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को उजागर किया गया.
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
सम्मेलन के पहले दिन का समापन एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में दोनों क्षेत्रों की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया गया. इस कार्यक्रम ने सम्मेलन में उपस्थित सभी लोगों को भारतीय और दक्षिण-पूर्व एशियाई सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराया.
सम्मेलन में शरीक हुई हस्तियां
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में गोलोक बिहारी राय, विरेन्द्र कुमार चौधरी, अरुण कुमार, डॉ. एम. रहमतुल्लाह, प्रो महरुख मिर्ज़ा, राजेश महाजन और कई अन्य बुद्धिजीवी और शिक्षाविद उपस्थित थे. सम्मेलन ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है.
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