गुजरात में अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में अपनी श्रेष्ठता साबित की है. अस्पताल के बाल रोग सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एक ढाई साल के बच्चे की अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया है. जन्मजात दुर्लभ बीमारी के कारण बच्चे की भोजन नली (Food Pipe) बनी ही नहीं थी, लेकिन सफल ऑपरेशन के बाद अब मासूम पहली बार अपने मुंह से खाना खाने लगा है.
अहमदाबाद जिले के सानंद निवासी शैलेश पटेल के बेटे मंतव्य का जन्म 7 नवंबर 2023 को हुआ था. जन्म से ही वह ‘प्योर ओसोफेगल एट्रेसिया’ (Pure Esophageal Atresia) नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था. इस बीमारी में भोजन नली के दोनों सिरे इतनी दूरी पर होते हैं कि एक पूरी नली का निर्माण नहीं हो पाता, जिससे बच्चा मुंह से कुछ भी निगलने में असमर्थ होता है.
23 दिन की कड़ी निगरानी और ‘एडवांस्ड गैस्ट्रिक पुल-अप’ तकनीक
जन्म के दूसरे दिन ही डॉक्टरों ने बच्चे की जान बचाने के लिए गले में छेद (‘ओसोफेगोस्टोमी’) और पेट में सीधे नली डालकर (‘गैस्ट्रोस्टोमी’) उसे तरल आहार देना शुरू किया था. जब बच्चे का शारीरिक विकास और वजन सही हो गया, तो डॉक्टरों ने पक्की सर्जरी का फैसला किया.
3 जुलाई को ‘एडवांस्ड गैस्ट्रिक पुल-अप’ (Advanced Gastric Pull-Up) तकनीक के जरिए सर्जरी की गई. इस तकनीक में पेट के एक हिस्से का इस्तेमाल कर नई भोजन नली बनाई जाती है. ऑपरेशन के 23 दिन बाद मंतव्य ने जीवन में पहली बार मुंह से खाना खाया, जिसे देख उसके माता-पिता भावुक हो गए.
मुफ्त हुआ लाखों का इलाज, 85-90% है सफलता दर
यह जटिल सर्जरी अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और बाल रोग सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश जोशी के नेतृत्व में हुई. टीम में डॉ. जयश्री रामजी और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अदिति व सोनल भलावत शामिल थीं.
डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में यह बेहद खर्चीला इलाज है, लेकिन अहमदाबाद सिविल अस्पताल में यह पूरी तरह मुफ्त किया गया. ‘गैस्ट्रिक पुल-अप’ सर्जरी की सफलता दर 85 से 90 प्रतिशत होती है और उनकी टीम पिछले एक साल में ऐसे 7 जटिल मामलों का सफल इलाज कर चुकी है.
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