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अभिषेक बनर्जी की ‘क्राइम’ टाइमलाइन: TMC के किस कागज के पीछे पड़ी है CID?

Abhishek Banerjee CID probe: हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से TMC में आंतरिक संकट, बगावत और बिखराव के दौर से गुजर रहा है. लेकिन इस सबके बीच अभिषेक बनर्जी पर क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) का शिकंजा कसता जा रहा है.

Abhishek Banerjee CID probe

Abhishek Banerjee CID probe

Abhishek Banerjee CID probe: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) इन परेशानियों के केंद्र में बने हुए हैं. हालांकि, इसकी शुरुआत विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद से हुई. फिलहाल पार्टी गहरे आंतरिक संकट, बगावत और बिखराव के दौर से गुजर रही है. लेकिन इस सबके बीच अभिषेक बनर्जी पर क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) का शिकंजा कसता जा रहा है. आइए जानते हैं कि CID अभिषेक बनर्जी के पीछे क्यों पड़ी है. और क्या है फर्जी हस्ताक्षर का पूरा मामला.

यहां से शुरू हुआ मामला

पूरा मामला ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के कालीघाट स्थित घर पर हुई एक बैठक से शुरू हुआ, जहां विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर चर्चा की गई थी.आरोप है कि इस बैठक से जुड़े दस्तावेजों पर कुछ विधायकों की मौजूदगी के बिना ही उनके हस्ताक्षर दिखाए गए. इन दावों के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद तेज हो गया. आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन.

अभिषेक पर लगे फर्जी हस्ताक्षर मामले की पूरी टाइमलाइन

  • 6 मई 2026: विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कथित प्रस्ताव पारित होने का दावा. बाद में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इस दिन किसी भी प्रस्ताव के पारित होने से इनकार किया और प्रस्ताव को जाली बताया.
  • 9 मई 2026: अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को सूचना भेजकर बताया कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुना गया है.
  • इसके बाद: विधानसभा के प्रधान सचिव ने अभिषेक बनर्जी से उस बैठक का पूरा ब्योरा मांगा, जिसमें नेता प्रतिपक्ष के चयन का फैसला होने का दावा किया गया था.
  • 20 मई 2026: अभिषेक बनर्जी ने बैठक का ब्योरा विधानसभा सचिवालय को सौंप दिया.
  • 27 मई 2026: विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने लिखित शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि 6 मई के कथित प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षरों का दुरुपयोग किया गया और दस्तावेज में 14 हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों (Block Letters) में किए गए हैं, जो संदेह पैदा करते हैं.
  • शिकायत के बाद: पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निलंबित कर दिया गया.
  • मामले की जांच: पूरे प्रकरण की जांच CID को सौंपी गई.
  • 11 जून 2026: CID ने अभिषेक बनर्जी से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की.
  • 14 जून 2026: CID अभिषेक बनर्जी से दोबारा पूछताछ करेगी.

इसी मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से गुरुवार को कोलकाता में सीआईडी ने लंबी पूछताछ की. पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष के चयन से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर उनसे करीब 6 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए. अभिषेक शाम 5:50 बजे सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे और रात करीब 11:30 बजे वहां से निकले.


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TMC में 73 नेता पार्टी के खिलाफ

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अब तक काफी झटके लग चुके है. पार्टी के 80 से अधिक विधायकों में से करीब 64 विधायक ममता बनर्जी के खिलाफ खड़े हो गए हैं. निलंबित विधायक रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर खुद को असली TMC के रूप में मान्यता देने की मांग की है. वहीं, लोकसभा के 19 और राज्यसभा के 4 सांसदों ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

-भारत एक्सप्रेस



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