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अबूझमाड़ में स्वतंत्रता की नई भोर! नक्सली खौफ को मात देकर आजादी के बाद पहली बार फहरा तिरंगा

Chhattisgarh Flag hoisting: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के नौ गांवों में आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया. नक्सली हिंसा के साये में लंबे समय से दबे समुदायों के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण था.

Chhattisgarh Flag Hoisting

Chhattisgarh Flag Hoisting

Chhattisgarh Flag hoisting: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के नौ गांवों में आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया. नक्सली हिंसा के साये में लंबे समय से दबे समुदायों के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण था.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कोरस्कोडो, हाचेकोटी, अदनार, बोटर, कुमनार, दीवालूर, गुंडेकोट, रेकापाल और रस्मेता गांवों के ग्रामीणों ने दशकों से चले आ रहे भय से मुक्त होकर खुले दिल से गर्व और उत्साह के साथ इस अवसर को मनाया.

ये दूरस्थ गांव कभी इस क्षेत्र के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में से थे, जहां शीर्ष नक्सली नेतृत्व के छिपने के ठिकाने और परिचालन केंद्र हुआ करते थे. भय के माहौल के कारण निवासियों के लिए राष्ट्रीय त्योहार मनाना या तिरंगा फहराना जोखिम भरा था.

नक्सल मुक्त घोषित हुआ क्षेत्र

31 मार्च, 2026 को इस क्षेत्र को नक्सली प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद स्थिति बदल गई. अधिकारियों ने आगे बताया कि यह स्वतंत्रता दिवस ग्रामीणों के लिए पूर्ण सम्मान और सामूहिक उल्लास के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का पहला अवसर था.

जैसे ही तिरंगा आकाश में लहराया, लंबे समय से भय में जी रहे चेहरों पर राहत और अपनेपन की भावना स्पष्ट रूप से झलक उठी. ध्वजारोहण के इस साधारण कार्य का गहरा अर्थ था. इसने भय के युग के अंत और देश के लोकतांत्रिक जीवन में खुली भागीदारी की शुरुआत का संकेत दिया.

लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज को दी सलामी

निवासियों ने ध्वज को सलामी दी, उत्सव की भावना साझा की और वर्षों के अलगाव के बाद राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की. स्थानीय समारोहों में भावना और आशा दोनों झलक रही थीं.

कई ग्रामीणों के लिए, यह दिन बेहद व्यक्तिगत था, इस बात की पुष्टि कि शांति लौट आई है और अब विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ें जम सकती हैं. यह आयोजन इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि अबूझमाड़ हिंसा से आगे बढ़कर स्थिरता और समावेश की ओर बढ़ रहा है.

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इन नौ गांवों में, जहां कभी नक्सली नियंत्रण था, अब भारतीय तिरंगा लहरा रहा है. यह क्षण एक शांत लेकिन शक्तिशाली बदलाव को दर्शाता है: भय की जगह स्वतंत्रता, संघर्ष की जगह शांति और एक ऐसे क्षेत्र में साझा राष्ट्रीय भविष्य का वादा साकार हो रहा है जो लंबे समय से इससे अलग-थलग रहा था.

-भारत एक्सप्रेस



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