दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने वर्ष 2019 में एक महिला को तेजाब पीने के लिए मजबूर करने के जुर्म में सास और ननद को दोषी ठहराया है. कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ट्विंकल वाधवा ने महिला के पति को भी मारपीट के मामले में दोषी ठहराया है. कोर्ट ने कहा कि यह साबित हुआ है कि उसने बेल्ट से पीटा था. अदालत यह आदेश महिला के पति शमीन, सास हसीना और ननद शबनम के खिलाफ आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुचाना) और 326 A (स्वेच्छा से तेजाब का इस्तेमाल करके गंभीर चोट पहुचाना) आदि के मामले में सुनवाई करते हुए पारित किया है.
महिला को तेजाब पीने के लिए किया मजबूर
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया है कि शमीन ने अपनी पत्नी की पिटाई की थी. उसके बाद अन्य लोगों ने उसे 5 मार्च 2019 को तेजाब पीने के लिए मजबूर किया. अदालत ने कहा कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दोहराते हुए अपनी पीड़ां और संबंधित घटनाओं को स्पष्ट रूप से सुनाया. कोर्ट सजा के बिंदुओं पर 12 मार्च को सुनवाई करेगा. अदालत ने बचाव पक्ष की व्स दलील को खारिज कर दिया कि मेडिको लीगल में कोई बाहरी चोट नहीं है.
कोर्ट ने कही ये बात
अदालत ने कहा कि बेल्ट से पिटाई से काफी दर्द और आघात हो सकता है, लेकिन इस्तेमाल किए गए बल, प्रभाव और व्यक्ति की त्वचा की संवेदनशीलता के आधार पर बाहरी चोटें दिखाई नहीं भी दे सकती है. उसने बयान में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे अदालत यह निष्कर्ष निकाल सके कि वह सच नहीं बोल रही है. बचाव पक्ष के वकील ने यह भी कहा था कि घटना के दो दिन बाद शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारी को हाथ से लिखे बयान में लिखा कि उसने गुस्से में गलती से तेजाब पी लिया था. पति के परिवार के सदस्यों के खिलाफ झूठे आरोप अप्रैल 2019 में लगाए गए. उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने झूठी गवाही दी थी, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया.
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