Global Indology Conclave: इंडोलॉजी को आसान भाषा में समझें तो यह भारत की सभ्यता, शास्त्रों, भाषाओं, दर्शन, कला और वैज्ञानिक विरासत का वैश्विक अध्ययन है. यही अध्ययन भारत को दुनिया के सामने उसकी असली पहचान दिलाता है.
भारत का ज्ञान मॉडल
प्रधानमंत्री मोदी ने G20 जोहान्सबर्ग में कहा था कि भारत की सभ्यतागत बुद्धि आज दुनिया के लिए नया मॉडल है. इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा नीति 2020 में इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (IKS) को शामिल किया गया है, ताकि प्राचीन विज्ञान और ग्रंथ आधुनिक शिक्षा का हिस्सा बन सकें.
अदाणी का बड़ा योगदान
कॉन्क्लेव में अदाणी ग्रुप चेयरमैन गौतम अदाणी ने 100 करोड़ रुपये का फंड देने का ऐलान किया. इसका मकसद भारत नॉलेज ग्राफ तैयार करना और इंडोलॉजी को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना है. उन्होंने नई नालंदा जैसी विश्वस्तरीय संस्थाएं बनाने का भी विजन रखा.
संतों और विद्वानों का संदेश
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने कहा कि असली शिक्षा वही है जिसमें ज्ञान के साथ संस्कार भी हों. वहीं रामायण के राम अरुण गोविल और महाभारत के कृष्ण नीतीश भारद्धाज ने बताया कि धर्म का मतलब नेतृत्व में स्पष्टता, साहस और करुणा है.
भारत की सॉफ्ट पावर
यह कॉन्क्लेव दिखाता है कि भारत अब सिर्फ दुनिया द्वारा पढ़ा जाने वाला देश नहीं बल्कि खुद अपनी सभ्यता का अध्ययन और नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बन रहा है. इंडोलॉजी भारत की सांस्कृतिक, कूटनीतिक और बौद्धिक ताकत के रूप में उभर रही है.
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हर भारतीय के लिए यह पहल अहम है क्योंकि अपनी ज्ञान परंपरा को फिर से अपनाना हमारी पहचान, गर्व और वैश्विक सम्मान को मजबूत करता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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