अडानी ग्रुप.
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन किया जा रहा है. इस महाकुंभ में भक्ति, आस्था और सनातन धर्म का अनूठा दृश्य दिखाई दे रहा है. जिसकी झलक पाने के लिए दुनियाभर से लोग खिंचे चले आ रहे हैं. 45 दिनों तक चलने वाले इस महाआयोजन में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है. ऐसे में महाकुंभ में इन लोगों की सुविधाओं के लिए सरकार से लेकर गैर सरकारी संगठन और उद्योग जगत की तमाम हस्तियां मदद कर रही हैं.
प्रतिदिन 60 से 80 हजार लोग खा रहे खाना
इसी कड़ी में अडानी ग्रुप भी कई स्तरों पर अभियान चलाकर लोगों को खाना वितरित करने के साथ ही तमाम सुविधाएं मुहैया करा रहा है. अडानी ग्रुप ISCON के साथ मिलकर महाकुंभ मेला के इतिहास में सबसे बड़े स्तर पर भोजन वितरण का कार्यक्रम चला रहा है. अडानी और इस्कॉन की ओर से चलाई जा रही रसोई में प्रतिदिन 60 से 80 हजार लोगों को भोजन वितरित किया जा रहा है. 45 दिनों में करीब 5 मिलियन श्रद्धालु इसका लाभ उठाएंगे. इतने बड़े स्तर पर चलाया जा रह अभियान अडानी ग्रुप के मानव कल्याण और सेवा के भाव को दर्शाता है.
एक करोड़ आरती संग्रह की प्रतियां वितरित की
अडानी ग्रुप ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी एक अहम कदम उठाया है. अडानी ग्रुप ने गीता प्रेस से 10 मिलियन आरती संग्रह पुस्तकों को खरीद कर महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं को नि:शुल्क वितरित की हैं. बता दें कि गीता प्रेस को साल 2014 में तमाम वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा था.
अडानी समूह में मेला क्षेत्र में आए हुए श्रद्धालुओं, जिसमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों को स्नान के दौरान सहायता के लिए 100 गोल्फ कार्ट की तैनाती की है, जिससे महाकुंभ में आए हुए लोगों की किसी भी परिस्थिति में मदद की जा सके.
महाकुंभ मेला जाएंगे गौतम अडानी
इन सबके बीच,अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी महाकुंभ मेला का दौरा करेंगे. इस दौरान तीर्थ यात्रियों को किए जा रहे भोजन वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके अलावा वह 18 हजार सफाईकर्मियों से मुलाकात करेंगे.
महाकुंभ के इस आयोजन में 25 हजार सफाई कर्मचारी तैनात हैं.
अडानी ग्रुप के 5 हजार से ज्यादा कर्मचारी महाकुंभ मेला में वालंटियर का काम कर रहे हैं.
सभी सफाई कर्मचारियों को 45 दिनों के इस महा आयोजन के दौरान मुफ्त खाना दिया जा रहा है.
अडानी ग्रुप की ओर से महाकुंभ मेले में चलाए जा रहे इन अभियान के जरिए तीर्थ यात्रियों की मदद, सांस्कृतिक संरक्षण के साथ ही आध्यात्मिक सेवा को सामाजिक सेवा से जोड़ने का काम किया जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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