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आरोपी पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ FIR में हस्तक्षेप से इंकार, जांच पूरी होने तक गिरफ्तारी पर रोक; विदेश जाने पर प्रतिबंध

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में हस्तक्षेप से इनकार किया, लेकिन गिरफ्तारी पर रोक लगाई है. कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया अपराध प्रतीत हो रहा है, इसलिए निष्पक्ष विवेचना आवश्यक है.

Muhammad Zubair

 


विधि संवाददाता प्रयागराज


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी यति नरसिंहा नंद गिरी के बयान को लेकर डासना मंदिर पर भीड़ को हमले के लिए ट्वीट कर उकसाने के आरोपी पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है.

किंतु कहा है कि विवेचना पूरी होने तक याची ज़ुबैर की गिरफ्तारी नहीं की जाय बशर्ते वह विवेचना में सहयोग करें.साथ ही कोर्ट ने विवेचना के दौरान याची ज़ुबैर के देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा एफआईआर से प्रथमदृष्टया अपराध का खुलासा हो रहा है.

कोर्ट का बयान: FIR से प्रथम दृष्टया अपराध की पुष्टि होती है

कोर्ट ने कहा कि किसी के साथ अन्याय न होने पाये, इसलिए विवेचना जरूरी है. याची को अंतरिम राहत मिली थी ,उसने दुरूपयोग नहीं किया है. इसलिए उसे विवेचना पूरी होने तक संरक्षण दिया जा रहा है.
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति डा वाई के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मोहम्मद ज़ुबैर की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याची पर कई बार ट्वीट कर लोगों को यति नरसिंहा नंद के खिलाफ भड़काने के आरोप में गाजियाबाद के कविनगर थाने में उदिता त्यागी ने 7अक्टूबर 24को एफआईआर दर्ज कराई.

आरोप लगाया कि याची के ट्वीट से भड़के सैकडों लोगों ने डासना मंदिर पर हमला किया. शिकायतकर्ता व यति नरसिंहा नंद मंदिर में मौजूद थे. पुलिस ने 3 अक्टूबर 24 को नरसिंहा नंद के 29सितंबर 24के बयान को लेकर एफआईआर दर्ज की थी. इस कार्रवाई को नाकाफी मान याची ने पब्लिक को हमले के लिए भड़काया.और हमला किया गया. शिकायतकर्ता को धमकी भी दी गई.

सिर्फ फैक्ट-चेक किया, अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग किया

याची अधिवक्ता का कहना था कि उसके खिलाफ धारा 152भारतीय न्याय संहिता का अपराध नहीं बनता.उसने फैक्ट चेक किया था. अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल किया था.कुछ लोगों के मंदिर पर हमले से उसके ट्वीट को नहीं जोड़ा जा सकता.

देश की 142.80करोड की आबादी में केवल 536.7हजार लोगों ने ही उसकी ट्वीट देखी है.यह भीड़ भरे थियेटर में आग का टेस्ट करने जैसा मामला नहीं है. कोर्ट ने कहा कि तथ्यों से प्रथमदृष्टया अपराध का खुलासा होता प्रतीत हो रहा है जिसकी विवेचना जरूरी है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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