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अमित शाह का लद्दाख दौरा: बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध की शरण में होंगे गृहमंत्री, अवशेषों को करेंगे नमन

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 30 अप्रैल को लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं. 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर वे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को नमन करेंगे. ये दौरा लद्दाख की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

Amit Shah

उत्तर भारत की तपती गर्मी के बीच देश के गृहमंत्री अमित शाह पहाड़ों की शांति और आध्यात्मिकता के बीच पहुंचने वाले हैं. अमित शाह 30 अप्रैल से लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव 1 मई को होने वाली ‘बुद्ध पूर्णिमा’ है, जब गृहमंत्री भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के सामने शीश नवाएंगे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. प्रशासन ने इस दौरे को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं और स्थानीय लोगों में भी इस वीआईपी मूवमेंट को लेकर काफी उत्साह है.

आध्यात्मिक सुकून और लद्दाख की खूबसूरती

लद्दाख, जिसे हम ‘छोटा तिब्बत’ या ‘ऊंचे दर्रों की भूमि’ भी कहते हैं, इन दिनों अपनी पूरी रंगत में है. अमित शाह का ये दौरा सिर्फ राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से भी बड़ा संदेश देता है. लद्दाख की पहचान यहां के प्राचीन बौद्ध मठों से है. हेमिस, थिकसे और डिस्कित जैसे मठ न केवल अपनी वास्तुकला के लिए मशहूर हैं, बल्कि यहां की शांति किसी भी इंसान का मन मोह लेती है.

इसी आध्यात्मिक माहौल में गृहमंत्री का पैंगोंग त्सो और त्सो मोरीरी जैसी झीलों के करीब होना भारत की सीमाओं और संस्कृति, दोनों की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है. आपको बता दें कि पैंगोंग झील का बड़ा हिस्सा चीन की तरफ है, लेकिन भारत की तरफ वाला 40 प्रतिशत हिस्सा अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर के पर्यटकों की पहली पसंद है.

बुद्ध पूर्णिमा: एक तारीख, तीन महायोग

इस साल यानी 2026 में बुद्ध पूर्णिमा 1 मई को मनाई जा रही है. बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए ये दिन दीपावली जैसा महत्व रखता है. इसे ‘वैशाख पूर्णिमा’ भी कहा जाता है और इतिहास के पन्नों को पलटें तो भगवान बुद्ध के जीवन की तीन सबसे बड़ी घटनाएं इसी दिन हुई थीं.

करीब 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुंबिनी में उनका जन्म इसी दिन हुआ. सालों की तपस्या के बाद बोधगया में उन्हें ज्ञान (बोधि) भी इसी दिन प्राप्त हुआ और 80 साल की उम्र में कुशीनगर में उन्होंने इसी दिन महापरिनिर्वाण (देहतयाग) प्राप्त किया. येी वजह है कि इस दिन को शांति, करुणा और अहिंसा के उत्सव के रूप में मनाया जाता है.

सुरक्षा और प्रशासन की मुस्तैदी

गृहमंत्री के दौरे को देखते हुए लेह और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. स्थानीय प्रशासन और बौद्ध संगठनों के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है ताकि इस पावन अवसर पर होने वाले कार्यक्रम निर्बाध रूप से संपन्न हो सकें.

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-भारत एक्सप्रेस



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