आज पूरा देश ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ (National Science Day) मना रहा है. यह दिन न केवल महान भारतीय भौतिक विज्ञानी सर सी.वी. रमन द्वारा ‘रमन प्रभाव’ (Raman Effect) की खोज को याद करने का है, बल्कि यह उन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को सम्मान देने का भी है, जो अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित कर रहे हैं. इस खास अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सभी वैज्ञानिकों के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए उनके योगदान को सराहा है.
भविष्य को कर रही रोशन
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए लिखा, ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर हमारे सभी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को हार्दिक शुभकामनाएं.’
Greetings to all our scientists, researchers on #NationalScienceDay. Your quest lights our path shaping solutions for a better future. May this day renew our zest and resolve to innovate, build and craft destiny of our choice.
— Amit Shah (@AmitShah) February 28, 2026
अमित शाह ने आगे लिखा कि आपकी खोज हमारे भविष्य को रोशन करती है और बेहतर भविष्य के लिए समाधान तैयार करती है. आशा है कि यह दिन नवाचार करने, निर्माण करने और अपनी पसंद का भविष्य गढ़ने के हमारे उत्साह और संकल्प को फिर से जगाएगा.
विज्ञान के दम पर ‘विकसित भारत’ का सपना
इस साल के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का विषय ही है, “Women in Science: Catalysing Viksit Bharat”. यह थीम न केवल हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत का सम्मान करती है, बल्कि विशेष रूप से उन महिलाओं की भूमिका को भी उजागर करती है जो आज Science, Technology, Engineering and Mathematics (STEM) के क्षेत्रों में नई लकीरें खींच रही हैं.
आज के दौर में जब भारत चंद्रमा पर पहुंच चुका है और एआई (AI) की दुनिया में नेतृत्व कर रहा है, तो ऐसे में हमारे वैज्ञानिकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वह ‘ईंधन’ है जो भारत को एक विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनाने के लक्ष्य की ओर ले जा रहा है.
क्यों खास है 28 फरवरी?
1928 में आज ही के दिन सर सी.वी. रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) की उस अद्भुत घटना की खोज की थी, जिसे आज हम दुनिया भर में ‘रमन प्रभाव (Raman Effect)’ के नाम से जानते हैं. इसी खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. तब से लेकर आज तक, यह दिन हमें याद दिलाता है कि जिज्ञासा और धैर्य के साथ अगर सही दिशा में काम किया जाए, तो भारत दुनिया को दिशा दिखा सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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