भारत की आध्यात्मिक चेतना को जगाने वाले और स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्व के आध्यात्मिक गुरु रहे रामकृष्ण परमहंस जी की आज जयंती है. इस खास अवसर पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है. भारतीय राजनीति के प्रमुख स्तंभ और गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस महान संत को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने परमहंस जी के विचारों को आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक बताया जितना वे उनके जीवनकाल में थे.
विश्वबंधुत्व का दिया संदेश: Amit Shah
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर महान संत को याद करते हुए लिखा, ‘अध्यात्म और सत्यनिष्ठ जीवन के माध्यम से विश्वबंधुत्व का संदेश देने वाले रामकृष्ण परमहंस जी ने सम्पूर्ण मानव जाति को एक नई दिशा दी.’
अध्यात्म और सत्यनिष्ठ जीवन के माध्यम से विश्वबंधुत्व का संदेश देने वाले रामकृष्ण परमहंस जी ने सम्पूर्ण मानव जाति को एक नई दिशा दी। उनके उच्च आदर्श और दूरदर्शी विचार हर आयु-वर्ग के लोगों के लिए सदैव प्रेरणीय रहेंगे।
महान संत रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। pic.twitter.com/v5keaG73Zt— Amit Shah (@AmitShah) February 18, 2026
उन्होंने आगे लिखा कि उनके उच्च आदर्श और दूरदर्शी विचार हर आयु-वर्ग के लोगों के लिए सदैव प्रेरणीय रहेंगे. महान संत रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन.’
सादगी और भक्ति की अनूठी मिसाल
18 फरवरी को बंगाल के हुगली जिले में जन्में गदाधर चट्टोपाध्याय, जिन्हें दुनिया आज रामकृष्ण परमहंस के नाम से जानती है, का जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं था. वे एक ऐसे संत थे जिन्होंने किताबी ज्ञान से ऊपर उठकर ‘ईश्वर के साक्षात्कार’ को ही जीवन का एकमात्र सत्य माना. दक्षिणेश्वर काली मंदिर में उनकी भक्ति की कहानियां आज भी लोगों को भावुक कर देती हैं.
परमहंस जी का सबसे बड़ा संदेश ‘सर्वधर्म सद्भाव’ का था. उन्होंने अपने जीवन में विभिन्न धर्मों की साधना की और अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि सभी रास्ते एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं. “यतो मत, ततो पथ” यानी जितने मत, उतने पथ. आज के दौर में जब दुनिया धर्म और विचारधाराओं के नाम पर बंटी हुई है, उनके ये विचार विश्व शांति का सबसे बड़ा मंत्र साबित हो सकते हैं.
स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन की नींव
रामकृष्ण परमहंस जी की सबसे बड़ी देन उनके प्रिय शिष्य स्वामी विवेकानंद थे. एक साधारण से गदाधर को ‘परमहंस’ बनाने की यात्रा और फिर एक विद्रोही नरेंद्र को ‘स्वामी विवेकानंद’ में बदलने का श्रेय उनकी आध्यात्मिक शक्ति को ही जाता है. विवेकानंद ने अपने गुरु के ही संदेश को ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ (मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है) के रूप में पूरी दुनिया में फैलाया. आज ‘रामकृष्ण मिशन’ दुनिया भर में शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत के क्षेत्रों में जो निस्वार्थ सेवा कर रहा है, उसकी जड़ में परमहंस जी के आदर्श ही हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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