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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, बोले- उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के लिए डॉ. मुखर्जी का योगदान सदैव याद रखा जाएगा.

amit shah pays tribute

भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Shyama Prasad Mukherjee) की 125वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. इस मौके पर उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रहित को समर्पित कर दिया और देश की एकता व अखंडता के लिए उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करता रहेगा.

‘राष्ट्र प्रथम’ को बनाया जीवन का उद्देश्य

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उन नेताओं में थे जिन्होंने हमेशा “राष्ट्र प्रथम” की सोच को सर्वोच्च स्थान दिया. उन्होंने लिखा कि बंगाल के विभाजन के समय डॉ. मुखर्जी ने दूरदर्शिता और दृढ़ नेतृत्व का परिचय दिया. साथ ही जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा.

गृह मंत्री ने कहा कि सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और राष्ट्रीय एकता के लिए उनका समर्पण आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

वीडियो संदेश में बताया ऐतिहासिक योगदान

श्रद्धांजलि के साथ अमित शाह ने एक वीडियो संदेश भी जारी किया. इसमें उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कभी व्यक्तिगत प्रसिद्धि या राजनीतिक लाभ के लिए काम नहीं किया. उनके हर निर्णय का उद्देश्य देश का हित था और समय के साथ उनके फैसलों का महत्व और अधिक स्पष्ट होता गया.

शाह ने कहा कि देश के विभाजन के दौरान पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने में डॉ. मुखर्जी की अहम भूमिका रही. उनके प्रयासों की वजह से आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न राज्य है.

धारा 370 के खिलाफ आंदोलन का किया जिक्र

गृह मंत्री ने अपने संदेश में जम्मू-कश्मीर से जुड़ी उस ऐतिहासिक लड़ाई का भी उल्लेख किया, जिसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने धारा 370 के विरोध में आंदोलन चलाया था. उन्होंने कहा कि उस समय जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान, अलग झंडा और अलग प्रधानमंत्री की व्यवस्था थी, जिसे डॉ. मुखर्जी भारत की एकता के लिए उचित नहीं मानते थे.


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अमित शाह के मुताबिक, इसी सोच के साथ उन्होंने “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” का नारा दिया और दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक यात्रा शुरू की. जब उन्हें कश्मीर में प्रवेश के लिए परमिट दिखाने को कहा गया तो उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में हिरासत के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, जिसे शाह ने संदेहास्पद बताया.

-भारत एक्सप्रेस



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