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‘रक्षा और मानवीय सेवा का बेजोड़ संगम…’, असम राइफल्स के 191वें स्थापना दिवस के अवसर पर क्या बोले अमित शाह?

देश के सबसे पुराने अर्धसैनिक बल असम राइफल्स के 191वें स्थापना दिवस पर अमित शाह ने जवानों को सलाम किया. उन्होंने कहा कि यह बल सीमा सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय सेवा और विकास का भी मजबूत स्तंभ है…

देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बल, असम राइफल्स के 191वें स्थापना दिवस (Assam Rifles 191st Raising Day) के अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीर जवानों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं. अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में बल के अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण की सराहना की.

गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि असम राइफल्स के जवान केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते बल्कि पूर्वोत्तर के चुनौतीपूर्ण इलाकों में स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर मानवीय सहयोग और विकास के कार्यों के जरिए ‘विश्वास’ का सेतु भी बनाते हैं. उन्होंने उन वीर शहीदों को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.

वीरता और मानवीयता का प्रतीक: अमित शाह का विजन

गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने पूर्वोत्तर में शांति और सुरक्षा की जो नई इबारत लिखी है उसमें असम राइफल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है. शाह ने अपने संदेश में विशेष रूप से बल के उस ‘दोहरे चरित्र’ की प्रशंसा की, जहां वे एक तरफ उग्रवाद और सीमा पार की चुनौतियों से लोहा लेते हैं, तो दूसरी तरफ आपदा प्रबंधन और सामाजिक सरोकारों में सबसे आगे रहते हैं.

उनके अनुसार, असम राइफल्स की वीरता और समर्पण ही वह प्रेरणास्रोत है, जिससे आज पूर्वोत्तर भारत विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ रहा है. शाह ने बल के पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिनके त्याग ने इस बल को ‘पूर्वोत्तर का मित्र’ (Friends of the Hill People) बनाया है.

1835 से अब तक: शौर्य और गौरव की गाथा

असम राइफल्स का इतिहास भारत के शौर्य का जीता-जागता दस्तावेज है. 1835 में ‘कछार लेवी’ के रूप में स्थापित यह बल आज भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है. इसकी विशिष्टता यह है कि यह वर्तमान में गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण और रक्षा मंत्रालय के परिचालन (Operational) नियंत्रण में कार्य करता है.

स्थापना दिवस के इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी जवानों को शुभकामनाएं दीं. डॉ. वीरेंद्र कुमार ने बल के 191 वर्षों के गौरवशाली सफर को सराहनीय बताया, वहीं सीएम सैनी ने इन्हें ‘पूर्वोत्तर के सच्चे प्रहरी’ के रूप में संबोधित किया.

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आपदा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’

असम राइफल्स केवल युद्ध या उग्रवाद तक सीमित नहीं है बल्कि पूर्वोत्तर में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी यह बल ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाता है. गृह मंत्री अमित शाह अक्सर इस बात पर जोर देते रहे हैं कि असम राइफल्स ने दुर्गम क्षेत्रों में सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुँचाने में जो सक्रियता दिखाई है, उसने स्थानीय लोगों के मन में भारतीय सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान को और गहरा किया है. आज का दिन (Assam Rifles 191st Raising Day) उन हजारों जवानों के संकल्प को दोहराने का दिन है जो शून्य से नीचे के तापमान और घने जंगलों के बीच तिरंगे की शान को बुलंद रखे हुए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस

 



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