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गुजरात में कांग्रेस की 41 साल से लगातार हार, राहुल गांधी को आत्ममंथन की जरूरत- अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का हवाला देते हुए मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि गुजरात में कांग्रेस पिछले 41 वर्षों से कोई चुनाव नहीं जीत सकी है और पार्टी को इस पर गंभीरता से आत्ममंथन करने की जरूरत है.

गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदर्शन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है. शाह ने कहा कि गुजरात में कांग्रेस को लंबे समय से चुनावी जीत नहीं मिली है. ऐसे में पार्टी के नेतृत्व को यह समझने की जरूरत है कि आखिर लगातार हार के पीछे क्या वजहें हैं. उन्होंने BJP की जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जनता के भरोसे से जोड़ते हुए कहा कि चुनावी नतीजों को नजरअंदाज करने के बजाय कांग्रेस को अपनी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

अमित शाह ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों का जिक्र करते हुए दावा किया कि तीन नगर निकायों की कुल 104 सीटों में से BJP ने 90 सीटों पर जीत दर्ज की. गांधीनगर नगर निगम में भी पार्टी ने अपना प्रदर्शन बेहतर किया. शाह के मुताबिक, यहां BJP ने 44 में से 38 सीटें जीत लीं.

उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की. शाह ने कहा कि AAP ने गांधीनगर में सभी 32 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी किसी भी सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा सकी. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले चुनाव के मुकाबले गांधीनगर नगर निगम में BJP के वोट प्रतिशत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

शाह ने इन नतीजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के भरोसे का संकेत बताया. कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने गुजरात में आखिरी बार 1985 में चुनावी जीत हासिल की थी. इसके बाद से उसे लगातार हार का सामना करना पड़ा है. उनके मुताबिक, इतने लंबे समय तक चुनाव नहीं जीत पाना कांग्रेस के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए.

SIR पर भी कांग्रेस को घेरा

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी अमित शाह ने राहुल गांधी पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में BJP की जीत को भी SIR का नतीजा बताया जाएगा?

शाह का कहना था कि BJP की लोकप्रियता को किसी एक प्रक्रिया से जोड़कर खारिज करने के बजाय कांग्रेस को अपने संगठन और राजनीतिक रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गुजरात जैसे राज्य में, जहां कांग्रेस पहले सत्ता में रह चुकी है, वहां इतने लंबे समय से चुनावी सफलता नहीं मिलना पार्टी के लिए आत्ममंथन का विषय है.

दूसरे राज्यों के चुनावी नतीजों का भी किया जिक्र

अमित शाह ने अपने बयान में दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनावी नतीजों का भी हवाला दिया. उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए उपचुनावों का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस इन चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत सकी.

शाह के अनुसार, नौगांव में BJP उम्मीदवार ने 1.42 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की और कांग्रेस से यह सीट छीन ली. वहीं, नंदीग्राम में BJP उम्मीदवार को 76 प्रतिशत वोट मिले और उन्होंने 1.22 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

पश्चिम बंगाल की रेजीनगर सीट को लेकर भी शाह ने BJP की जीत का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पार्टी ने यहां 75 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की और तृणमूल कांग्रेस से सीट अपने नाम कर ली.

पुडुचेरी के नतीजों पर बात करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) के उम्मीदवार ने 8,482 वोटों से जीत दर्ज की. उनके मुताबिक, इस चुनाव में कांग्रेस को केवल 22 प्रतिशत वोट मिले.

राजस्थान और त्रिपुरा में भी BJP के प्रदर्शन का दावा

शाह ने राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी पार्टी की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने दावा किया कि BJP ने राज्य के 90 प्रतिशत नगर निगमों, 66 प्रतिशत नगर परिषदों और 65 प्रतिशत नगर पालिकाओं में जीत हासिल की. उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में 85 प्रतिशत से ज्यादा वार्डों में AAP की जमानत जब्त हो गई.

त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों का जिक्र करते हुए शाह ने बताया कि वहां NDA को करीब 4,000 सीटों पर सफलता मिली. उनके दावे के मुताबिक, गठबंधन ने 3,248 सीटें जीतीं और लगभग 900 अन्य सीटों पर भी जीत हासिल की. इन चुनावों में गठबंधन का कुल वोट प्रतिशत 77.5 रहा.

लगातार हार के कारणों पर विचार करने की सलाह

अमित शाह ने इन तमाम चुनावी नतीजों के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक स्थिति का आकलन करने की सलाह दी. उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार मिल रही चुनावी हार के कारणों को समझना और संगठन को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाना कांग्रेस के लिए अहम है.

हालांकि, शाह के बयान में दिए गए आंकड़े और चुनावी नतीजों की उनकी राजनीतिक व्याख्या उनके अपने दावों के रूप में देखी जानी चाहिए. इन नतीजों से जुड़ी व्यापक तस्वीर समझने के लिए संबंधित चुनावों के आधिकारिक आंकड़े और सभी प्रमुख दलों के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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