दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में एक बार फिर वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा, जो बढ़कर AQI 461 तक पहुंच गया है. गाजियाबाद में 448, नोएडा में 441 एक्यूआई दर्ज हुआ, जो गंभीर श्रेणी में आता है.
गंभीर स्तिथि में दिल्ली-NCR
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे लाखों लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया है. मंगलवार सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 461 रिकॉर्ड किया गया. वहीं, नोएडा 441 और गाजियाबाद 448 एक्यूआई के साथ खतरनाक स्तर पर हैं, जबकि गुरुग्राम में AQI 352 के साथ ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया.
आपको बता दें की ये हालत केवल एनसीआर रीजन का ही नहीं, बल्कि इससे बाहर मेरठ और लखनऊ की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है.
विशेषज्ञों की मानें तो प्रदूषण का यह स्तर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों के लिए अत्यंत हानिकारक है, जिससे फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है.
50 फिसदी वर्क फ्रॉम होम का आदेश
प्रदूषण के इस गंभीर संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे इस जहरीली हवा में लोगों को थोड़ी राहत मिल सके. दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी सरकारी और निजी दफ्तरों के लिए 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) का आदेश दिया है. यह कदम ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत उठाया गया है. इससे सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को कम होगी, ताकि वायु प्रदूषण के कारकों में कटौती हो सके.
फैसले के अनुसार, कार्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों की उपस्थिति 50% से अधिक न हो और जहां पर संभव हो, वहां काम के अलग-अलग समय को अपनाया जाए.
क्या है वायु प्रदूषण के कारक?
प्रदूषण के इस खतरनाक उछाल के कारकों में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, ठंडी हवाओं की कमी और तापमान में गिरावट शामिल हैं. इसके अलावा, गाड़ियों का उत्सर्जन और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज से उड़ने वाली धूल भी इसका कारण है.
डॉक्टरों ने यह सलाह दी है कि अनावश्यक रूप से कहीं बाहर न निकलने और अगर निकलना जरूरी हो तो N95 मास्क का उपयोग जरूर करें. साथ ही, बच्चों और बुजुर्गों को पूरी तरह से घर के अंदर रखने और घरों में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने की अपील भी की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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