Aravalli Mining Ban: केंद्र सरकार ने अरावली पहाड़ियों को बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि अब अरावली के पूरे क्षेत्र में किसी भी तरह की नई माइनिंग (खनन) के लिए लाइसेंस या लीज नहीं दी जाएगी. यानी गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली पूरी अरावली रेंज में अब खनन पूरी तरह बंद होगा. इस कदम से अवैध खनन पर लगाम लगेगी और पहाड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.
अवैध खनन रोकना मुख्य उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद पहाड़ों में हो रहे अवैध और अनियमित खनन को पूरी तरह रोकना है. संरक्षित क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा और अरावली की रक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. पहले से दिए गए खनन पट्टों के नियम और सख्त किए जाएंगे. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन किया जाएगा.
राज्यों को मिले निर्देश
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्यों को इसके लिए निर्देश जारी किए हैं. मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) को भी कहा है कि वह अरावली में ऐसे और इलाकों की पहचान करे जहां खनन पर रोक लगनी चाहिए. इनकी पहचान इकोलॉजिकल, जियोलॉजिकल और लैंडस्केप स्तर पर की जाएगी.
Centre will protect entire Aravallis; No Mining Leases; Protected Zone to be Expanded@byadavbjp
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— PIB | MoEFCC (@EnvironmentPib) December 24, 2025
वैज्ञानिक योजना बनेगी
केंद्र सरकार ने ICFRE को अरावली क्षेत्र में सतत खनन (Sustainable Mining) के लिए एक वैज्ञानिक योजना (MPSM) बनाने का निर्देश दिया है. यह योजना देखेगी कि खनन का प्रकृति पर कितना असर पड़ रहा है और अरावली क्षेत्र कितना भार सह सकता है. संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर उन्हें खनन से बचाया जाएगा.
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‘नो-माइनिंग जोन’ का विस्तार
जहां पहले खनन हो चुका है, वहां सुधार और हरियाली वापस लाने के उपाय किए जाएंगे. इस योजना को जनता और विशेषज्ञों की राय के लिए सार्वजनिक किया जाएगा. इससे पूरे अरावली क्षेत्र में ‘नो-माइनिंग जोन’ का दायरा बढ़ेगा और पर्यावरण की रक्षा मजबूत होगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और सभी पर्यावरणीय शर्तों का कड़ाई से पालन किया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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