Bastar Naxal Free Amit Shah Deadline 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए 31 मार्च 2026 की जो लक्ष्मण रेखा खींची थी, छत्तीसगढ़ सरकार ने उसे समय से पहले ही लगभग छू लिया है. राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर में एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि बस्तर का 96 प्रतिशत हिस्सा अब माओवादियों के खूनी चंगुल से पूरी तरह आजाद है.
बता दें कि यह सफलता(Naxal Free India 2026) केवल एक सैन्य जीत नहीं बल्कि अमित शाह के उस ‘कमांड एंड कंट्रोल’ विजन का नतीजा है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि विकास की राह में रोड़ा बनने वाले उग्रवाद के लिए अब भारत में कोई जगह नहीं है. विजय शर्मा ने बताया कि बस्तर जो कभी हिंसा का पर्याय था अब केरल जैसे बड़े राज्य से भी बड़े क्षेत्रफल में शांति और प्रगति की नई इबारत लिख रहा है.
पापा राव के सरेंडर से मिली बड़ी कामयाबी
दरअसल बस्तर में माओवादी आंदोलन की कमर तब पूरी तरह टूट गई जब टॉप कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. पापा राव का सरेंडर अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ‘पूना मार्गेम’ (नया रास्ता) नीति की सबसे बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. पापा राव जैसे पुराने और खूंखार लड़ाके का मुख्यधारा में लौटना यह साबित करता है कि माओवाद का विचार अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है.
शाह की डेडलाइन(Naxal Free India 2026) से कुछ दिन पहले आए इस परिणाम ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बस्तर के सीमावर्ती इलाकों में केवल गिनती के 35-40 कैडर बचे हैं. सरकार अब बस्तर के जल, जंगल और जमीन पर वहां के आदिवासियों का वास्तविक हक बहाल कर अमित शाह के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा कर रही है.
सुरक्षा कैंपों का ‘इंटीग्रेटेड विकास’ मॉडल
गृह मंत्री अमित शाह का मानना रहा है कि केवल हथियार से नक्सलवाद नहीं मरेगा बल्कि वहां तक सरकार को पहुंचना होगा. इसी रणनीति के तहत पिछले एक दशक में स्थापित 400 से अधिक पुलिस कैंपों की भूमिका अब पूरी तरह बदलने वाली है. विजय शर्मा ने बताया कि इन कैंपों को अब ‘एकीकृत विकास केंद्र’ (Integrated Development Centres) में तब्दील किया जा रहा है.
शाह के निर्देशानुसार, जिन कैंपों ने सुरक्षा की कमी को भरा था, वही अब स्कूल, अस्पताल और राशन दुकानों के रूप में काम करेंगे. पिछले दो वर्षों में ही 120 ‘फॉरवर्ड बेस कैंप’ स्थापित कर नक्सलियों की रसद और सप्लाई लाइन काट दी गई, जिससे अब प्रशासन के पास इन दुर्गम इलाकों में सीधे सरकारी योजनाएं पहुँचाने का रास्ता साफ हो गया है.
अमित शाह की कौन सी तकनीकी काम कर गई?
नक्सलवाद के खिलाफ इस अंतिम युद्ध में अमित शाह ने अत्याधुनिक तकनीक और केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय पर जोर दिया था. ISRO की सैटेलाइट इमेजरी, NTRO की तकनीकी खुफिया जानकारी और NSG के बम निरोधक दस्तों ने मिलकर माओवादियों के उन सुरक्षित ठिकानों को भी ध्वस्त कर दिया, जहाँ पहले सुरक्षा बल जाने से कतराते थे.
बता दें कि ITBP और अन्य तकनीकी शाखाओं के साथ मिलकर सुरक्षा बलों ने ‘जीरो कैजुअलिटी’ के लक्ष्य के साथ नक्सलियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. गृह मंत्री के मॉडर्न पुलिसिंग के विजन ने बस्तर के उन जंगलों में भी तिरंगा लहरा दिया है, जो दशकों से ‘नो-गो जोन’ बने हुए थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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