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भारत एक्सप्रेस का ‘बज्म-ए-सहाफत’ कॉन्क्लेव: IAS रश्मि सिंह ने कहा – नए भारत की पहचान, भाषा और संस्कृति से बनती है

Bharat Express Urdu Conclave: भारत एक्सप्रेस (Bharat Express) के बैनर तले दिल्ली के उर्दू अकादमी में आयोजित ‘बज्म-ए-सहाफत’ (Bazm-e-Sahafat) कार्यक्रम में उर्दू भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया गया. इस कॉन्क्लेव में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ( Delhi CM Rekha Gupta) और भारत एक्सप्रेस के सीएमडी उपेंद्र राय (CMD Upedra Rai) शामिल हुए. कार्यक्रम की अतिथि IAS डॉ. रश्मि सिंह (Rashmi Singh) ने कहा कि नए भारत की पहचान केवल विकास नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और साहित्य से बनती है.

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Bharat Express Urdu Conclave: भारत एक्सप्रेस के बैनर तले उर्दू को बढ़वा देने और वैश्विक पहचान के लिए “बज्म-ए-सहाफत” का प्रोग्राम आयोजित किया गया है. यह प्रोग्राम बुधवार (26 नवंबर) को दिल्ली के उर्दू अकादमी में कराया जा रहा है. इस उर्दू कॉन्क्लेव में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Delhi CM Rekha Gupta) मुख्य अतिथि के रूप में नजर आई हैं, साथ ही कैंद्र मंत्री रामदास आठवले (Ramdas Athawale) ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की है.

उर्दू के लिए आयोजित इस शाम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और भारत एक्सप्रेस के एडिटर-इन-चीफ और सीएमडी उपेंद्र राय (CMD Upedra Rai) ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की है. साथ ही IAS ऑफिसर और आकांक्षा समिति की अध्यक्ष डॉ. रश्मि सिंह (Rashmi Singh) भी शामिल रही हैं.

नए भारत की पहचान सिर्फ इमारतों से नहीं, भाषा और संस्कृति से बनती है- IAS रश्मि सिंह

दिल्ली में आयोजित उर्दू अकादमी में भारत एक्सप्रेस कार्यक्रम की अतिथि IAS रश्मि सिंह ने कहा कि नए भारत की असली पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और साहित्य से होती है, सिर्फ इमारतों, सड़कों और विकास से नहीं. संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष सेशन में वक्ता ने उर्दू भाषा की अहमियत, उसकी तहजीब और भारतीयता में उसके योगदान पर विस्तार से बात रखी.

भाषा से बनती है राष्ट्र की पहचान

डॉ. रश्मि सिंह ने कहा कि आज जब भारत टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्टार्टअप और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब भी देश की जड़ें भाषा और संस्कृति से ही मजबूती पाती हैं. उन्होंने कहा, “किसी भी देश की असली पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और साहित्य से होती है. नए भारत की बात करते हुए उर्दू और भारतीय भाषाओं का जिक्र करना हमारा गर्व ही नहीं, फर्ज भी है.”

कार्यक्रम में उर्दू की समृद्धि और उसकी तहजीब को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सौहार्द, अदब, मोहब्बत और इज्जत की नुमाइंदगी करती है. उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू दीवारें खड़ी करने वाली नहीं, बल्कि पुल बनाने वाली भाषा है, जो देश की विविधता को जोड़ती है.

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डिजिटल युग में उर्दू के नए अवसर

भाषण के अंत में IAS डॉ. रश्मि सिंह ने कहा कि डिजिटल युग ने भारतीय भाषाओं के लिए बड़े अवसर खोले हैं, खासकर पत्रकारिता और युवा वर्ग के लिए. कम लागत में भाषा आधारित कंटेंट को दुनिया तक पहुंचाने की क्षमता आज पहले से कहीं अधिक है.

-भारत एक्सप्रेस



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