bharat bhusan tiwari case update
Bharat Tiwari case update: भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी की मौत के बाद उनकी मां आशा देवी के लिए हर दिन अपने बेटे की याद और इंसाफ की उम्मीद के बीच गुजर रहा है.सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के ऐलान के बाद भी मां का दर्द कम नहीं हुआ.आशा देवी ने साफ कहा कि उन्हें पैसे या नौकरी का लालच नहीं है.उनकी सबसे बड़ी मांग है कि जिन लोगों को वह अपने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार मानती हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाए और अदालत से कड़ी सजा दिलाई जाए.
‘मेरा बेटा लोगन खातिर जियत रहल…’
आशा देवी बेटे को याद करते हुए भावुक हो उठीं.उन्होंने कहा, “मेरा बेटा लोगन खातिर जियत रहल, उहे लोगन खातिर आज शहीद हो गइल बा.” मां के इन शब्दों में बेटे को खोने का दर्द भी है और उसके लिए न्याय पाने की जिद भी.उनका कहना है कि भरत लोगों की समस्याओं के लिए आवाज उठाता था और जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़ा रहता था.
मां बोलीं- बेटे को मिले शहीद का दर्जा
आशा देवी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भरोसा जताते हुए सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं.वह चाहती हैं कि भरत तिवारी को शहीद का दर्जा दिया जाए.इसके साथ ही विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है.
न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के बाद बढ़ी उम्मीद
भरत तिवारी की मौत के मामले में न्यायिक जांच चल रही है.जांच आयोग ने पीड़ित पक्ष के लोगों के बयान दर्ज किए थे और बाद में पुलिस अधिकारियों व कर्मियों से भी पूछताछ की गई. अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता और नौकरी की घोषणा की.
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मां की नजर अब कार्रवाई पर
आशा देवी के लिए सरकारी मदद से ज्यादा मायने बेटे की मौत का सच सामने आना है.वह चाहती हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई हो.बेटे की तस्वीर सामने आते ही मां की आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन उनकी आवाज में एक बात साफ सुनाई देती है—उन्हें मुआवजा नहीं, अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए.
भारत एक्सप्रेस
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