भीलवाड़ा/जहाजपुर: गार्नेट घोटाले में अवैध वसूली का मामला अब गहराता जा रहा है. मुख्य आरोपी अजय पांचाल की गिरफ्तारी के बाद जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं. पुलिस ने पांचाल सहित चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है, जिनके मोबाइल डेटा से अहम सुराग मिले हैं.
भौकाल के लिए औढ़ा चोगा
जांच में सामने आया कि अजय पांचाल खुद को प्रभावशाली दिखाने के लिए गाड़ी पर ‘विधायक’ लिखवाकर घूमता था. इतना ही नहीं उसकी गाड़ी का नंबर भी स्थानीय विधायक गोपीचंद मीणा की गाड़ी से मिलता-जुलता बताया जा रहा है. इस समानता को लेकर अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश.
वहीं विधायक गोपीचंद मीणा ने पांचाल से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार किया है. उनका कहना है कि पांचाल केवल चुनाव प्रचार के दौरान उनके संपर्क में आया था. हालांकि, इस दावे पर सवाल तब खड़े हो गए जब धर्मेंद्र यादव ने बयान दिया कि दोनों हाल ही में उनके कार्यालय में साथ आए थे.
प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई कार्रवाई
मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई है. माधव उपाध्याय को एपीओ किया गया है, जबकि बडलियास थाना प्रभारी मुन्नीराम चोयल पर भी कार्रवाई की गई है. बावजूद इसके, स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह कार्रवाई मामले की गंभीरता के मुकाबले पर्याप्त नहीं है.
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में लंबे समय से अवैध वसूली का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसे अब उजागर किया जा रहा है. ऐसे में यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या इस नेटवर्क को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था.
फिलहाल जांच जारी है, लेकिन यह स्पष्ट हो चुका है कि मामला केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है. आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं, जिससे पूरे सिस्टम और संभावित संरक्षण की भूमिका पर से पर्दा उठ सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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