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बिहार में होनी वाली है 50,000 पुलिस कर्मियों की बहाली, जानिए क्या है प्लान?

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस ने कई अहम उपलब्धियां गिनाईं. हत्या और डकैती के मामलों में कमी के साथ राज्य को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त बताया गया है.

रिपोर्ट- आशुतोष


बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार और पुलिस की ओर से बड़ी जानकारी सामने आई है. गृह विभाग के अधिकारियों ने राज्य में अपराध की स्थिति, नक्सल विरोधी अभियान, पुलिस भर्ती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आंकड़ा साझा किया हैं. पुलिस का दावा है कि पिछले कुछ समय में अपराध के कई मामलों में कमी आई है और नक्सलवाद के मोर्चे पर भी बिहार ने बड़ी कामयाबी हासिल की है.

बिहार के डीजीपी विनय कुमार, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम, एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार, गृह सचिव प्रणव कुमार और स्पेशल सेक्रेटरी होम डिपार्टमेंट क्षेत्रनील सिंह ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी दी.

गृह विभाग के मुताबिक, बिहार में हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. वहीं डकैती के मामलों में 31.32 प्रतिशत और गंगा नदी में अपराध से जुड़े मामलों में 18.97 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है.

डीजीपी ने यह भी कहा कि पहले बिहार में हर साल करीब 15 हजार दंगे दर्ज होते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 100 के आसपास रह गई है. हत्या की घटनाओं में भी कमी आई है. पुलिस के अनुसार हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग, जमीन से जुड़े विवाद और पारिवारिक झगड़े जैसे कारण अक्सर सामने आते हैं.

नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता

बिहार पुलिस के लिए नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि अब राज्य का कोई भी जिला उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में नहीं है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से पहले बिहार में नक्सलवाद एक गंभीर चुनौती हुआ करता था. अब सरकार की कोशिश है कि जिन इलाकों में कभी उग्रवाद का असर था, वहां विकास को तेज किया जाए. पर्यटन, शिक्षा और उद्योग के जरिए इन क्षेत्रों को नई पहचान देने पर जोर दिया जा रहा है.

डेढ़ साल में 22 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की भर्ती

बिहार पुलिस में खाली पदों को भरने की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है. डीजीपी के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में 22 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती हो चुकी है. इसके अलावा 26,574 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है.

पुलिस का लक्ष्य है कि इस भर्ती प्रक्रिया को अगले एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाए. कुल मिलाकर डेढ़ साल की अवधि में बिहार पुलिस में 50 हजार से ज्यादा नए पुलिसकर्मियों की भर्ती करने की तैयारी है. इससे थानों और पुलिस बल पर काम का दबाव कम होने और कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

सिर्फ पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि पुलिस के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है. राज्य में करीब 600 थाना भवनों का निर्माण चल रहा है. इसके अलावा आपात स्थिति में लोगों तक पुलिस की मदद तेजी से पहुंचाने के लिए डायल-112 के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विकसित किया जा रहा है.

इसके लिए करीब 172 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. पटना में पुलिस साइबर सेल के लिए एक बड़ा और आधुनिक भवन बनाने की भी योजना है. बढ़ते साइबर अपराध के दौर में पुलिस की साइबर जांच क्षमता बढ़ाने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज की भी भूमिका जरूरी

डीजीपी ने नशे को आने वाले समय की बड़ी चुनौतियों में शामिल किया. उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार गांजा और अन्य ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ रही है. कई मामलों में ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा नशीला सामान भी जब्त किया गया है.

हालांकि उन्होंने साफ कहा कि युवाओं को नशे से बचाना सिर्फ पुलिस का काम नहीं है. परिवार, स्कूल, समाज और स्थानीय स्तर के लोगों को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी. उनका कहना था कि नशे की समस्या को केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि जागरूकता और सामाजिक सहयोग से भी रोकना जरूरी है.

मानव तस्करी और बच्चों की चोरी से जुड़ी घटनाओं को लेकर भी पुलिस ने चिंता जाहिर की. डीजीपी के अनुसार अशिक्षा और गरीबी ऐसी घटनाओं के पीछे बड़े कारणों में शामिल हैं. इसलिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ समाज को भी सतर्क रहना होगा.

उन्होंने लोगों से अपील की कि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही ना बरतें.

बिहार पुलिस के लिए एक और खास उपलब्धि सामने आई है. डीजीपी ने बताया कि बिहार पुलिस को पहली बार प्रेसिडेंट कलर अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य के 18 पुलिसकर्मियों को वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा.

भरत तिवारी मामले की जांच जारी

भरत तिवारी मामले को लेकर भी डीजीपी ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि मामले की न्यायिक जांच चल रही है. पुलिसकर्मियों की ओर से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है. डीजीपी ने कहा कि एके-47 का इस तरह इस्तेमाल कानून के मुताबिक स्वीकार्य नहीं है. घटना में शामिल एक पुलिसकर्मी को निलंबित किया जा चुका है, जबकि दूसरे पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच जारी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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