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ADGP Kundan Krishnan: 17 जुलाई दिन गुरुवार को हथियारों से लैस 5 अपराधियों ने बिहार की राजधानी पटना के पारस अस्पताल में घुसकर एक कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी. इससे पहले पूर्णिया में एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जला दिया गया. उससे पहले पटना में व्यवसायी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई. उसी दिन सिवान जिले में दो दर्जन से ज्यादा अपराधियों ने तलवार से 5 लोगों को काट डाला. जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी.
बिहार में लगातार हो रही हत्याओं ने पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़े कर दिये हैं. पर बिहार की पुलिस इसे मानने को तैयार नहीं है. बिहार पुलिस के लिए ये अपराध लचर कानून-व्यवस्था के चलते नहीं बल्कि मौसम के चलते हो रहा है.
बिहार के अपराधियों पर भूत हो गया है सवार
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, बिहार के अपराधियों पर भूत सवार हो गया है. आए दिन हो रही हत्याएं बिहार में बर्बाद हो चुकी कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस की कहानी कह रही है. लेकिन बिहार पुलिस के एडीजीपी के लिए यह कोई कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि मौसमी घटनाएं हैं.
#WATCH | Patna: Bihar ADG (HQ) Kundan Krishnan says, “Recently, a lot of murders have happened in the whole of Bihar. Most murders happen in the months of April, May and June. This continues until the rains come, as most farmers do not have work. After the rains, people in the… pic.twitter.com/b1OsUEWGTr
— ANI (@ANI) July 17, 2025
मौसमी पैटर्न की वजह से बिहार में हो रही हत्याएं- कुंदन कृष्णन
बिहार पुलिस के एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर कुंदन कृष्णन कल प्रेसवार्ता कर पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे. तभी हाल के दिनों में बिहार में लगातार हो रही हिंसा और हत्याओं के बारे में सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि, हाल के दिनों में सूबे में हो रही हत्याएं जैसे, पटना में व्यापारी गोपाल खेमका और बीजेपी नेता की हत्या ये सब मौसमी पैटर्न की वजह से है.
चुनावों की राजनीतिक तपीश बढ़ा रही है अपराध
कुंदन कृष्णन ने आगे कहा कि जून और जुलाई में हत्याओं के मामले बढ़ जाते हैं क्योंकि तापमान में बदलाव और आर्थिक तनाव हत्या जैसे अपराधों को बढ़ाते हैं. वो यहीं नहीं रुके, उन्होंने इन हत्याओं के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहरा दिया. एडीजीपी ने कहा कि इस समय किसानों में फसलों की बर्बादी और राज्य में चुनावों की राजनीतिक तपीश अपराध दर को बढ़ा रही है.
किसानों के पास कोई काम नहीं, इसलिए बढ़ रहा अपराध
कुंदन कृष्णन आगे कहते हैं कि, ज्यादातर हत्याएं मई और जून के महीने में होती है, क्योंकि गर्मी बहुत ज्यादा होती है. हत्याओं का ये सिलसिला तबतक चलता है जबतक बारिश नहीं हो जाती. बारिश नहीं होने तक किसानों के पास कोई काम नहीं होता है, इस दौरान अपराध बढ़ जाता है.
एडीजीपी साहब को किसान अपराधी लगते हैं. उनके हिसाब से सूबे में सबसे ज्यादा हत्याएं किसान करते हैं. इसलिए अब माफियाओं, हत्यारों, किडनैपर्स पर सख्ती की जरूरत नहीं है.
– भारत एक्सप्रेस
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