किंगमेकर चिराग पासवान का का 'सीक्रेट गेम'
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच, एनडीए के सीट बंटवारे ने एक बड़ा राजनीतिक सस्पेंस पैदा कर दिया है. जहां बीजेपी और जेडीयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, वहीं चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटों का बड़ा हिस्सा मिला है. सवाल यह है कि नीतीश कुमार और बीजेपी ने अपनी सीटें कम करके भी चिराग पासवान को इतनी अहमियत क्यों दी? जबकि, गठबंधन के अन्य दो सहयोगियों को महज 6-6 सीटें ही ऑफर की गई हैं.
चिराग पासवान की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ कुछ सीटें जीतने तक सीमित नहीं है. वह खुद को बिहार की अगली पीढ़ी के नेताओं में स्थापित करना चाहते हैं. वह बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं और बीजेपी के साथ उनके रिश्ते मजबूत हुए हैं. उन्हें NDA का समर्थन मिल रहा है. अब यह सीट शेयरिंग में साफ हो गया है.
100 फीसदी का स्ट्राइक रेट (Chirag Paswan strike rate in Bihar election)
चिराग पासवान अपने पिता राम विलास पासवान की राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं. उनकी पार्टी का दलित वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है. 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था और पांचों सीटों पर जीत हासिल की थी.
जातीय समीकरण में फायदा (Bihar election Chirag Paswan caste equation)
चिराग का फायदा यह भी है कि वह एनडीए के जातीय समीकरण को वह संतुलित करते हैं. बीजेपी को सवर्ण और शहरी वोटर, जेडीयू को कुर्मी और पिछड़े वर्ग का साथ मिलता है. वहीं चिराग की पार्टी दलित समुदाय में गहरी पकड़ है.
दलित वोट पर नजर (Chirag Paswan Dalit vote Bihar election)
दिग्गज दलित नेता राम विलास पासवान की राजनीतिक विरासत चिराग पासवान संभाल रहे हैं. राम विलास पासवान को बिहार में गहरी जड़ें वाला दलित नेता माना जाता रहा है. दुसाध में उनके बात बेटे ने अपनी पकड़ मजबूत की है. NDA इस वोट बैंक को किसी भी होल में खोना नहीं चाहता है.
एनडीए का फोकस गठबंधन की सरकार
एनडीए का पूरा फोकस इस समय एकजुटता और जीत पर है. इस मिशन में चिराग पासवान की भूमिका अहम मानी जा रही है. गठबंधन का कोई भी दल चिराग को नाराज नहीं करना चाहता है. क्योंकि, उनकी नाराजगी सभी पर भारी पड़ सकती है.
चिराग पासवान की संभावित सीटें (Bihar election Chirag Paswan Possible seats)
बीजेपी और जेडीयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. एलजेपी (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 6-6 सीटें दी गई हैं. इसमें से एलजेपी (रामविलास) की संभावित सीटें बखरी, साहिबपुर कमाल, तारापुर, रोसड़ा, राजा पाकड़, लालगंज, हायघाट, गायघाट, एकमा, मढ़ौरा, अगिआंव, ओबरा, अरवल, गया, हिसुआ, फतुआ, दानापुर, ब्रह्रपुर, राजगीर, कदवा, सोनबरसा, बलीरामपुर, हिसुआ, गोविंदपुर, सिमरी बख्तियारपुर, मखदूम, कसबा, सुगौली, मोरवा हैं.
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‘किंगमेकर’ की भूमिका (Kingmaker Chirag Paswan)
इस बार के सीट बंटवारे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चिराग पासवान अब एनडीए में सिर्फ एक सहयोगी दल के नेता नहीं, बल्कि ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं. दुसाध समुदाय पर उनकी मजबूत पकड़ ने एनडीए के जातीय समीकरण को संतुलित किया है, जिससे नीतीश कुमार और बीजेपी को अपनी कुछ सीटें छोड़ने के बावजूद उन्हें महत्व देना पड़ा. जहां, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं को सिर्फ 6-6 सीटें मिली हैं, वहीं चिराग को मिली 29 सीटें यह संकेत देती हैं कि एनडीए का पूरा फोकस अब ‘चिराग की रोशनी’ के दम पर जीत सुनिश्चित करने पर है.
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