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दुलारचंद हत्याकांड में उछला नाम, बाहुबली टैग से सांसद तक; अब पत्नी के सहारे सूरजभान सिंह की सियासत; जानें क्राइम और सियासी करियर

Bihar Election 2025: बिहार चुनाव 2025 में मोकामा की राजनीति फिर सुर्खियों में है. जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के बाद आरजेडी नेता सूरजभान सिंह का नाम चर्चा में है. कभी बाहुबली से सांसद बने सूरजभान सिंह अब पत्नी वीणा देवी के सहारे सियासी मैदान में हैं. जानिए, उनके अपराध जगत से राजनीति तक का सफर से मौजूदा चुनाव तक की पूरी कहानी.

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सूरजभान सिंह के आपराधिक और राजनीतिक करियर

Bihar Election 2025: साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में खून की एंट्री के साथ ही इतिहास के पन्ने पलटे जाने लगे हैं. मोकामा में 30 अक्टूबर 2025 को जनसुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई. मामले में अभी तक पुलिस ने कोई खुलासा नहीं किया है लेकिन नेता और मीडिया में इसे ‘बाहुबलियों’ की सियासी जंग बताया जा रहा है. दुलारचंद यादव के परिजनों ने अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर आरोप लगाया तो अनंत सिंह एक और बाहुबली सूरजभान सिंह (Surajbhan Singh) का नाम घसीट लाए. ऐसे में अब प्रदेश के बाहुबलियों और उनके चुनावी दखल की बात होने लगी है.

बिहार की सियासत में ‘बाहुबलियों’ का दखल कोई नई बात नहीं है. इन्हीं नामों में से एक सूरजभान सिंह नाम है. उनका सफर एक जमीनी अपराधी से शुरू होकर विधायक और फिर सांसद की कुर्सी तक पहुंचा. फिलहाल, उनका नाम मोकामा की चुनावी राजनीति में सुर्खियों में है. ऐसे में आइये जानें क्या है उनकी सियासी और क्राइम प्रोफाइल?

दुलारचंद यादव हत्याकांड (Dularchand Yadav Murder Case)

सूरजभान सिंह के करियर और क्राइम फाइल की बात करें इससे पहले वो मामला जान लेते हैं जिसमें उनका नाम आ रहा है. मोकामा में 30 अक्टूबर 2025 को जनसुराज पार्टी के समर्थक और पूर्व राजद नेता दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वे जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी (लल्लू मुखिया) के लिए प्रचार कर रहे थे. पुलिस ने मृतक के पोते रविरंजन यादव के बयान पर हत्या (IPC धारा 302) सहित कई धाराओं में FIR दर्ज की है. मृतक के परिवार का आरोप है कि पहले पैर में गोली मारी गई, फिर लाठी-डंडों से पीटा गया और अंत में कार से कुचल दिया गया. इसके बाद से ही प्रदेश में सियासत गरमाई हुई है.

सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की प्रत्याशी हैं. हालांकि, सूरजभान सिंह ने इन आरोपों पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है. खैर अनंत सिंह, वीणा देवी और जनसुराज के पीयूष प्रियदर्शी के बीच मोकामा की त्रिकोणीय लड़ाई के बीच हुए इस हत्याकांड ने तनाव बढ़ा दिया है.

मोकामा का नया मोर्चा (Bihar Election Mokama)

दुलारचंद यादव हत्याकांड ने मोकामा विधानसभा उपचुनाव को गरमा दिया है. इस मामले में, जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह ने सीधा आरोप सूरजभान सिंह पर लगाया है. अनंत सिंह का दावा है कि सूरजभान सिंह ने चुनावी नुकसान पहुंचाने के लिए अपने ही समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या करवाई. उन्होंने कहा कि ये सारा खेल सूरजभान सिंह का है. दुलारचंद उनके ही पुराने समर्थक थे.

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सूरजभान सिंह के बाहुबल से सियासत तक का सफर (History of Surajbhan Singh)

बाहुबली नेता सूरजभान सिंह का जन्म 5 मार्च 1965 को पटना जिले के मोकामा में एक गरीब किसान परिवार में हुआ. उनके दो भाई थे. उनके पिता चाहते थे कि लंबी कद-काठी वाला बेटा फौज में जाए, लेकिन सूरजभान ने अपराध का रास्ता चुना, जो उनके परिवार के लिए त्रासदी लेकर आया. सूरजभान का शुरुआती दौर रंगदारी और दहशत फैलाने जैसी छोटी-मोटी घटनाओं से शुरू हुआ, लेकिन 90 के दशक में उनका अपराध चरम पर था.

राजनीति में प्रवेश और उत्थान (Surajbhan Singh Politics Nexus)

अपराधिक गतिविधियों के बावजूद, सूरजभान ने 90 के दशक के अंत में राजनीति की ओर रुख किया और अभूतपूर्व सफलता पाई. पहले निर्दलीय चुनाव लड़कर अपने गुरू के खिलाफ जीत हासिल की उसके बाद लोक जनशक्ति पार्टी से संसज पहुंच गए. हालांकि, हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 2009 में वह चुनाव नहीं लड़ पाए और अपनी पत्नी को आगे कर दिया.

  • 2000: गुरु दिलीप सिंह (तत्कालीन मंत्री) के खिलाफ मोकामा से निर्दलीय चुनाव लड़ा और भारी अंतर से जीत हासिल की.
  • 2004: वे लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर बिहार के बलिया (बेगूसराय) लोकसभा सीट से सांसद बने.
  • 2009: रामी सिंह हत्याकांड में दोषी ठहराए जाने के कारण चुनाव आयोग ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया.
  • 2014: रालोजपा/एनडीए टिकट पर पत्नी वीणा देवी ने 2014 और 2024 में मुंगेर लोकसभा सीट से जीत हासिल की.
  • 2025: लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) से इस्तीफा देने के बाद वह राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में शामिल हो गए.

पिता और भाई की मौत कारण बने (Surajbhan Singh Crime Nexus)

90 के दशक में सूरजभान सिंह अनंत सिंह के बड़े भाई और तत्कालीन राजनेता दिलीप सिंह का हाथ थामा जो कांग्रेस विधायक श्याम सुंदर सिंह धीरज के लिए बूथ कैप्चरिंग करते थे. उन्होंने अपराध की शुरुआत अपने पिता के मालिक से की थी. जब उन्होंने पिता के मालिक गुलजीत सिंह से रंगदारी मांगी. इससे शर्मिंदा और दुखी होकर उनके पिता ने गंगा में कूदकर आत्महत्या कर ली. कहा जाता है कि इस घटना के कुछ ही समय बाद, सीआरपीएफ में कार्यरत उनके बड़े भाई ने भी बदनामी के डर से जान दे दी थी.

अपराध के बड़े मामले और गैंगवार

आपराधिक रिकॉर्ड के मोर्चे पर सूरजभान का इतिहास काला है. 2000 के चुनाव के समय उनके खिलाफ बिहार और उत्तर प्रदेश में 26 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे. सूरजभान का इतिहास हत्या, अपहरण और जमीन हड़पने जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा रहा है. इसी कारण उनका नाम ‘बिहार के डॉन’ के रूप में जाना जाने लगा था.

रामी सिंह हत्याकांड (Rami Singh murder case)

  • 16 जनवरी 1992 को बेगूसराय के मधुरापुर गांव निवासी रामी सिंह की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा.
  • 24 जून 2008 को इस मामले में बिहार की निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई.
  • 2009 के रामी सिंह हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया.
  • आजीवन कारावास की सजा के बाद वह अदालत से जमानत पर बाहर भी आ गए.
  • मुख्य गवाह नागा सिंह और उनके पोते की 10 मई 2009 को बेगूसराय के बरौनी के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई.
  • इसी मामले में राम नरेश शर्मा (सरकारी वकील) हत्याकांड और अन्य आपराधिक मामले अभी भी लंबित हैं, जिनमें वे आरोपी हैं.

पार्षद उमेश यादव हत्याकांड (Councilor Umesh Yadav murder case)

  • 2003 में मोकामा में पूर्व पार्षद उमेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
  • इसमें भी सूरजभान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी लेकिन सुनवाई में वह बरी हो गए थे.
  • इस समय सूरजभान मोकामा से बिहार विधानसभा के विधायक भी थे.

बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड (Brij Bihari Prasad murder case)

  • 13 जून 1998 राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की पटना में अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी गई.
  • हत्या के समय सूरजभान बेऊर जेल में बंद थे, पर उन्हें साजिश रचने का आरोपी बनाया गया.
  • 2009 में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया.
  • 2014 में पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई के सबूतों को अपर्याप्त मानते हुए सूरजभान सहित सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया.

अशोक सम्राट गैंगवार (Ashok Samrat gang war)

  • उत्तर प्रदेश के बाहुबली अशोक सम्राट से वर्चस्व की लड़ाई में भी सूरजभान सिंह का नाम आया था.
  • मोकामा में हुई एक मुठभेड़ में सूरजभान के पैर में गोली लगी थी, जबकि उनके चचेरे भाई और शूटर मारे गए थे.

श्री प्रकाश शुक्ला का सूरजभान सिंह के संबंध (Shri Prakash Shukla Relationship Surajbhan Singh)

श्री प्रकाश शुक्ला और बिहार के बाहुबली सूरजभान सिंह के बीच संबंध अपराध जगत के भीतर एक गुरु-चेले के रिश्ते जैसा था. 90 के दशक में उत्तर प्रदेश और बिहार के अंडरवर्ल्ड को परिभाषित करता था. जब यूपी का गैंगस्टर श्री प्रकाश शुक्ला अपने पहले मर्डर के बाद पुलिस से भाग रहा था तब उसे मोकामा के बाहुबली सूरजभान सिंह ने शरण दी थी. सूरजभान ने शुक्ला को केवल आश्रय ही नहीं दिया, बल्कि उसे AK-47 जैसे आधुनिक हथियार भी उपलब्ध कराए. इन दोनों के गठबंधन ने बिहार और यूपी में अपहरण, रंगदारी और हत्याओं को अंजाम दिया, जिनमें 1998 में बिहार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या भी शामिल थी.

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दुलारचंद केस में आया नाम

सूरजभान सिंह का जीवन बिहार में अपराध-राजनीति के गठजोड़ का एक जीता-जागता उदाहरण है, जहां बाहुबल सत्ता की सीढ़ी बना. अब दुलारचंद यादव हत्या केस में उनका नाम सामने आने से मोकामा की राजनीति का तनाव फिर से चरम पर है. वीणा देवी आरजेडी से प्रत्याशी हैं, और यह हत्या का मामला मोकामा की त्रिकोणीय चुनावी जंग का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.



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