दुलारचंद यादव का सियासी सफर
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच मोकामा (Mokama) की धरती एक बार फिर खूनी राजनीति की गवाह बनी है. पहले चरण में वोटिंग से सिर्फ 6 दिन बाकी हैं, लेकिन मोकामा में जनसुराज पार्टी (Jan Suraj) के समर्थक दुलारचंद यादव (Dular Chand Yadav) की हत्या ने पूरे बिहार की राजनीति को हिला दिया है. इस मामले में मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगा है. दुलारचंद यादव की हत्या ने न सिर्फ प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी को गहरा आघात पहुंचाया है, बल्कि मोकामा के बाहुबली नेताओं की पुरानी अदावतों को भी सतह पर ला दिया है. इस हत्या पर तेजस्वी यादव ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जबकि अनंत सिंह ने इसे सूरजभान सिंह का ‘खेला’ करार दिया है.
90 के दशक में लालू यादव के करीबी और टाल क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले दुलारचंद यादव का सियासी सफर किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं रहा. उन्होंने अनंत सिंह के साथ अच्छे रिश्ते रखे, फिर उन्हें छोड़कर जन सुराज के लिए प्रचार करने लगे. आइये जानें उनका सियासी करियर कैसा रहा है?
कौन थे दुलारचंद यादव?
दुलारचंद यादव मोकामा के तारतर गांव में पैदा हुए थे, लेकिन बाद में बाढ़ में रहने लगे थे. टाल इलाके में उनकी मजबूत पकड़ थी और वे पहलवानी के शौकीन थे. पटना जिले के घोषबरी और बाढ़ थानों में उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं. साल 2019 में पटना पुलिस ने उन्हें कुख्यात अपराधी बताकर गिरफ्तार किया था. राजनीति में उनका आपराधिक बैकग्राउंड भी प्रभाव डालता था.
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लालू यादव के थे करीबी (Dular Chand Yadav Relation With Lalu Yadav)
80 और 90 के दशक में दुलारचंद यादव टाल इलाके के सबसे चर्चित और प्रभावशाली लोग थे. 90 के दशक में वे राजद नेता लालू प्रसाद यादव के करीब आए और मोकामा से चुनाव भी लड़े, हालांकि हार गए. बाद में वे कई पार्टियों और नेताओं के साथ सक्रिय रहे. पहले अनंत सिंह से भी उनके अच्छे संबंध थे और वे उनकी तारीफ करते थे. लेकिन इस साल वे अनंत सिंह को छोड़कर जनसुराज के पीयूष प्रियदर्शी (लल्लू मुखिया) के साथ हो गए और सोशल मीडिया पर अनंत सिंह के खिलाफ बोलने लगे, जिससे दोनों में दुश्मनी हो गई.
लल्लू मुखिया के लिए प्रचार (Dular Chand Yadav With Lallu Mukhia)
धानुक समाज से आने वाले लल्लू मुखिया जनसुराज के उम्मीदवार हैं. दुलारचंद उनके लिए जोर-शोर से प्रचार कर रहे थे. गुरुवार को मोकामा में पहले उन्हें लाठी-डंडों से पीटा गया, फिर गोली मारकर हत्या कर दी गई. लल्लू मुखिया ने अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया.
अनंत सिंह ने लगाया सूरजभान पर आरोप (Dular Chand Yadav Anant Singh Rivalry)
अनंत सिंह मोकामा से एनडीए के उम्मीदवार हैं. उन्होंने कहा कि वे अपने काफिले के साथ जा रहे थे, तभी दुलारचंद के लोगोंने उनके समर्थकों पर हमला किया. भीड़ में किसी ने गोली चला दी. अनंत ने पूरा मामला सूरजभान सिंह का बताया और कहा कि सूरजभान ने हत्या कराई ताकि चुनाव में नुकसान हो.
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हत्या के बाद गांव में तनाव
हत्या के 5 घंटे बाद तक ग्रामीणों ने शव नहीं उठने दिया, जिससे इलाका तनावपूर्ण हो गया. भारी पुलिस बल तैनात किया गया. मृतक के परिवार का आरोप है कि अनंत सिंह के समर्थकों ने पहले पैर में गोली मारी और फिर कार से कुचल दिया. अनंत के समर्थकों ने आरोप खारिज किए और वीडियो-फोटो जारी किए. उन्होंने कहा कि जनसुराज कार्यकर्ताओं ने पहले उनके काफिले पर पत्थरबाजी की, जिसमें कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं और आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए.
तेजस्वी यादव और पप्पू यादव ने उठाए सवाल
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चुनाव में आचार संहिता लगी है, फिर लोग हथियार कैसे लेकर घूम रहे हैं? पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव देर रात पीड़ित परिवार से मिले. बिना नाम लिए अनंत सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि हर बड़ी घटना में उनका नाम क्यों आता है? उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि असली अपराधियों को छोड़कर विपक्षी लोगों को फंसाने की कोशिश हो रही है. पप्पू ने चेतावनी दी कि ऐसे ही चला तो सूरजभान सिंह की हत्या न हो जाए.
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बाहुबल की राजनीति का नया अध्याय (Dular Chand Yadav Political History)
दुलारचंद यादव की हत्या ने मोकामा की राजनीति को एक बार फिर बाहुबल और चुनावी रंजिश के साये में ला दिया है. लालू यादव के पुराने करीबी और जन सुराज के सक्रिय प्रचारक होने के नाते, उनकी हत्या तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर दोनों के लिए एक राजनीतिक अवसर बन गई है. वहीं, बाहुबली अनंत सिंह पर लगे सीधे आरोपों और उनके द्वारा सूरजभान सिंह पर लगाए गए पलटवार ने मोकामा के चुनावी मैदान को खूनी अखाड़े में बदल दिया है. पप्पू यादव का घटना स्थल पर पहुंचना और सूरजभान सिंह की सुरक्षा पर आशंका जताना, दिखाता है कि यह हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि बिहार की बाहुबली राजनीति के एक नए अध्याय का दर्दनाक संकेत है.
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