Biogas Vehicle Scheme: भारत अब ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर बढ़ रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बड़ा ऐलान किया है कि आने वाले वक्त में भारत की गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल-डीजल की बजाय बांस, गोबर और कचरे जैसे वैकल्पिक स्रोतों से चलेंगी.
इस पहल का मकसद न सिर्फ तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है, बल्कि देश के गांव-देहातों में रोजगार और आमदनी के नए रास्ते भी खोलना है. गडकरी का कहना है कि ये कदम भारत को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के लिहाज से भी मजबूत बनाएगा.
फ्यूल क्रांति का नया रास्ता
सरकार अब चार प्रमुख वैकल्पिक ईंधनों पर काम कर रही है – ग्रीन हाइड्रोजन, इथेनॉल और फ्लेक्स फ्यूल, कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) और इसोब्यूटेनॉल मिक्स डीजल.
गोबर, कचरे और बांस से कम्प्रेस्ड बायोगैस और हाइड्रोजन तैयार करने के लिए देशभर में रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जा रहा है (Biogas Vehicle Scheme). कुछ बड़े शहरों में ट्रायल प्रोजेक्ट्स शुरू हो चुके हैं, जहां इन वैकल्पिक ईंधनों से ट्रक और बसें चलाई जा रही हैं.
हाइड्रोजन और बायोगैस ट्रकों की तैयारी
देश के कई हाइवे रूट्स जैसे दिल्ली-आगरा और मुंबई-पुणे पर हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों का परीक्षण शुरू हो चुका है. इन ट्रकों में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित इंजन या फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है.
सरकार ने देश में 9 से ज्यादा हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाने की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है. इसके अलावा गांवों में गोबर गैस और कचरे से बायोगैस बनाने वाले प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिससे गांव के किसान और पशुपालक अपनी आय बढ़ा सकें.
गांवों को मिलेगा बड़ा फायदा
गडकरी का कहना है कि ये योजना सिर्फ ईंधन के क्षेत्र में बदलाव नहीं लाएगी, बल्कि गांवों की आर्थिक हालत को भी बेहतर बनाएगी. गोबर, बांस और कचरे जैसी चीजें, जो अब तक बेकार मानी जाती थीं, अब किसानों और ग्रामीणों के लिए कमाई का जरिया बनेंगी. इनसे न सिर्फ ऊर्जा पैदा होगी, बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. साथ ही पर्यावरण पर भी इसका अच्छा असर पड़ेगा क्योंकि इन स्रोतों से बना ईंधन प्रदूषण रहित होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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