BJP Accuses Mallikarjun Kharge Of Land Grab: देश की सियासत में इन दिनों ‘जमीन’ को लेकर एक बड़ा घमासान छिड़ गया है. एक तरफ जहां कांग्रेस मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदने के आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने पलटवार करते हुए सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार को कटघरे में खड़ा कर दिया है. बीजेपी का आरोप है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने खड़गे परिवार के एक निजी ट्रस्ट को नियमों को ताक पर रखकर करीब 24 एकड़ की बेशकीमती सरकारी जमीन बांट दी.
क्या है मोहन यादव से जुड़ा विवाद?
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत एक प्रतिष्ठित न्यूज वेबसाइट की एक खोजी रिपोर्ट से हुई. रिपोर्ट में दावा किया गया कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनके भाई-बहन और चचेरे भाइयों ने उज्जैन में भारी मात्रा में जमीनें खरीदी हैं. कांग्रेस का आरोप है कि जिन जमीनों को खरीदा गया, ठीक उन्हीं के आसपास से सरकार के बड़े विकास प्रोजेक्ट्स पास कराए गए हैं. कांग्रेस इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर सीएम मोहन यादव पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है.
बीजेपी का पलटवार
कांग्रेस के इन आरोपों के जवाब में बीजेपी ने दिल्ली में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सीधे मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके मंत्री बेटे प्रियांक खड़गे पर कर्नाटक में ‘जमीनों की लूट’ करने का आरोप मढ़ दिया. भंडारी ने कहा कि खड़गे परिवार का ‘सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट’ है, जिसमें खड़गे, उनके बेटे, पत्नी और दामाद शामिल हैं. इस ट्रस्ट को कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) ने बेंगलुरु के एक औद्योगिक इलाके में 5 एकड़ जमीन आवंटित की, जिसकी आज बाजार में कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है.
बीजेपी का कहना है कि यह जमीन ‘एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में रिसर्च’ के लिए किसी औद्योगिक संस्था को मिलनी चाहिए थी, लेकिन इसे खड़गे के रसूख के कारण उनके प्राइवेट ट्रस्ट को दे दिया गया, जिसने आज तक इस क्षेत्र में कोई काम नहीं किया है. बीजेपी ने इसे गांधी-वाड्रा परिवार के मॉडल से जोड़ते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक गंभीर अपराध बताया.
दूसरा आरोप: गुलबर्गा में 19 एकड़ का आवंटन
बीजेपी ने खड़गे परिवार पर दूसरा हमला बोलते हुए कहा कि इसी ट्रस्ट को साल 2016 में यानी जब राज्य में कांग्रेस सरकार थी तब गुलबर्गा में 19 एकड़ जमीन और दी गई थी. यह जमीन ‘पाली भाषा’ के रिसर्च के लिए आवंटित की गई थी. बीजेपी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए पूछा कि यह कौन सा अनोखा ट्रस्ट है जो बेंगलुरु में स्पेस रिसर्च और गुलबर्गा में पाली भाषा की पढ़ाई का दावा करके करोड़ों की सरकारी जमीनें हासिल कर रहा है?
-भारत एक्सप्रेस
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