बिहार में जमुई की नाबालिग पीड़िता से जुड़े मामले को लेकर राजनीतिक विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है. भाजपा की विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) शीला पंडित ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेता और सांसद मीसा भारती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है. आरोप है कि जमुई की पीड़ित नाबालिग बच्ची के परिवार से जुड़ी एक तस्वीर मीडिया के सामने सार्वजनिक की गई और बाद में उसे सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किया गया.
शीला पंडित की ओर से दिए गए आवेदन में कहा गया है कि तस्वीर को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से दिखाया गया. इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से भी तस्वीर पोस्ट और प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है.
आवेदन में दावा किया गया है कि इस तरह तस्वीर सार्वजनिक होने से नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की पहचान सामने आने की स्थिति पैदा हो गई. शीला पंडित ने कहा है कि इससे बच्ची की निजता और गरिमा प्रभावित होने के साथ-साथ उसकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा हो सकती है.
आवेदन में इस मामले को पॉक्सो एक्ट की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के दायरे में आने वाला कथित अपराध बताया गया है. इसमें पॉक्सो एक्ट की धारा 23(2) का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है.
डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने की मांग
शीला पंडित ने पुलिस से मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है. आवेदन में मीडिया के सामने तस्वीर दिखाए जाने से संबंधित वीडियो फुटेज, फोटो, सोशल मीडिया पोस्ट, उनके यूआरएल और अन्य उपलब्ध डिजिटल सामग्री को संरक्षित करने का अनुरोध किया गया है.
इसके साथ ही आवेदन में कहा गया है कि पीड़ित नाबालिग बच्ची और उसके परिवार की पहचान को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएं. मामले में प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष और जल्द जांच करने तथा जांच के आधार पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की गई है.
वीडियो फुटेज भी आवेदन के साथ
आवेदन के साथ मीडिया के सामने तस्वीर सार्वजनिक किए जाने से संबंधित वीडियो या फुटेज भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीला पंडित ने संबंधित वीडियो और तस्वीरों की गोपनीयता बनाए रखने का अनुरोध किया है, ताकि पीड़िता या उसके परिवार की पहचान और अधिक सार्वजनिक न हो.
पहले भी पुलिस तक पहुंची थीं मीसा भारती
जमुई की घटना को लेकर मीसा भारती भी पहले पुलिस के पास पहुंची थीं. उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की थी. वहीं, इस पूरे प्रकरण से जुड़े एक मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी पहले ही दर्ज किए जाने की बात सामने आई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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