भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दावे पर पलटवार किया है. यह विवाद राहुल गांधी के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि अतीत में चुनाव आयुक्तों को एक ऐसी समिति चुनती थी जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) और विपक्ष के नेता (LoP) शामिल होते थे.
9 दिसंबर 2025 को ‘X’ पर प्रकाशित एक पोस्ट में, BJP ने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए पूछा कि वह कांग्रेस सरकारों के दौरान CJI या विपक्ष के नेता की भागीदारी वाली समिति के माध्यम से नियुक्त किए गए एक भी चुनाव आयुक्त का नाम बताएं.
🚨Rahul Gandhi Lies In Parliament
Rahul Gandhi says Election Commissioners used to be selected by committee consisting of CJI and LoP.
Can Rahul name one election commissioner during Congress govt chosen by committee with either CJI or LoP?
The committee was made… pic.twitter.com/whlPEEhj4j
— BJP (@BJP4India) December 9, 2025
BJP के अनुसार, समिति-आधारित यह व्यवस्था केवल अस्थायी थी, जिसे नया कानून बनने तक लागू किया गया था. पार्टी का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से प्रधान मंत्री ही चुनाव आयुक्तों की सीधी नियुक्ति करते रहे हैं.
BJP ने दावा किया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) के शासनकाल में कांग्रेस ने किसी भी कॉलेजियम-शैली की चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया. पार्टी ने 2005 में नवीन चावला की नियुक्ति का उदाहरण दिया और इस निर्णय के लिए सीधे तौर पर सोनिया गांधी को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी भूमिका पर सवाल उठाया.
BJP ने यह भी आरोप लगाया कि 2012 में 2014 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले जब नए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति होनी थी, तब वरिष्ठ BJP नेता एल.के. आडवाणी ने कांग्रेस को कॉलेजियम प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया था. हालांकि, कांग्रेस ने कथित तौर पर इस सुझाव को खारिज कर दिया और वी.एस. संपत को सीधे CEC नियुक्त किया, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने तुरंत मंजूरी दे दी.
BJP ने अपनी पोस्ट में कहा कि उस समय नियुक्ति प्रक्रिया में विपक्षी दलों से कोई परामर्श नहीं किया गया था.
CEC चयन पर बीजेपी का जोर
BJP ने अपनी बात को वर्तमान व्यवस्था के साथ तुलना करते हुए कहा कि मौजूदा प्रणाली में विपक्ष का नेता औपचारिक रूप से CEC का चयन करने वाली समिति का एक अभिन्न अंग है. पार्टी ने राहुल गांधी के बयानों को ‘ड्रामा’ करार दिया और तर्क दिया कि कांग्रेस नेता ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं, जबकि उन्हें नए CEC चयन की रचनात्मक प्रक्रिया में सहयोग देना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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