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BJP का ड्राइंग रूम वाला गुप्त चक्रव्यूह! 60 हजार सूरमाओं के साथ बंद कमरों में कैसे लिखी जा रही 2027 की पटकथा?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए नया अभियान शुरू किया है. ‘वन टू वन’ ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए 60 हजार पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया जाएगा.

 UP BJP Strategy: साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभी भले ही दूर हों, लेकिन देश की सबसे बड़ी राजनीतिक मशीनरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सूबे में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपना सबसे गुप्त और कड़क चक्रव्यूह जमीन पर उतार दिया है. सार्वजनिक रैलियों और बड़े सम्मेलनों से हटकर, इस बार बीजेपी ने एक बेहद शांत लेकिन बेहद मारक रणनीति बनाई है, जिसे नाम दिया गया है. प्लान ‘वन टू वन’ ड्राइंग रूम बैठकें.

इस महा-रणनीति के तहत पार्टी के शीर्ष नेता और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी खुद चलकर पुराने, नाराज और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के घर पहुंच रहे हैं. इस खामोश सियासी ऑपरेशन से विपक्षी खेमे में अभी से खलबली मच गई है.

60 हजार सिपाहियों की री-लॉन्चिंग(UP BJP Strategy)

बीजेपी के इस सीक्रेट प्लान का गणित बेहद दिलचस्प है. इसके तहत पूरे उत्तर प्रदेश में 10,000 से ज्यादा ‘ड्राइंग रूम’ बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिसके जरिए लगभग 60,000 पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क साधा जाएगा. पार्टी ने तय किया है कि जो पुराने सिपाही या पूर्व पदाधिकारी (पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री) किसी वजह से हाशिए पर चले गए थे, उन्हें अब लखनऊ या दिल्ली के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी खुद उनके घर जाकर सोफे पर बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ ‘संवाद, संपर्क और समन्वय’ का महामंत्र फूंक रहे हैं.

जिलों की गुटबाजी पर सर्जिकल स्ट्राइक

पंकज चौधरी ने इस पूरे अभियान (UP BJP 2027 Strategy )की कमान खुद अपने हाथों में ली है और ताबड़तोड़ जिलों के दौरे शुरू कर दिए हैं. उनका लक्ष्य अगले 3 महीनों के भीतर यूपी के सभी संगठनात्मक जिलों को नापना है. बंद कमरों में होने वाली इन ड्राइंग रूम बैठकों का असली मकसद सिर्फ मान-मनौव्वल नहीं बल्कि जिलों में पनप रही आंतरिक गुटबाजी पर सीधी सर्जिकल स्ट्राइक करना है.

यही नहीं बीजेपी नेतृत्व अच्छे से जानता है कि अगर कार्यकर्ता भीतरखाने बंटा रहा, तो नुकसान तय है. इसलिए, हर जिले में कमल के निशान पर सबको एकजुट करने और जमीनी हकीकत का फीडबैक सीधे कार्यकर्ताओं से लेने का यह अचूक फॉर्मूला है.

बूथ लेवल पर ‘वोटर एक्टिवेशन’ का अचूक फॉर्मूला

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम ( UP BJP Strategy) सीधे तौर पर बूथ मैनेजमेंट को री-चार्ज करने की कवायद है. ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए जब पुराने और सम्मानित नेताओं का मनोबल बढ़ेगा, तो उसका सीधा असर जमीनी स्तर के पन्ना प्रमुखों और बूथ कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा.

चुनाव के दिन वोटर्स को घरों से निकालकर मतदान केंद्र तक पहुंचाने का असली काम यही जमीनी कार्यकर्ता करते हैं. विपक्ष जब तक रैलियों और घोषणापत्रों का ताना-बाना बुनेगा, तब तक बीजेपी इस ‘ड्राइंग रूम डिप्लोमेसी’ के दम पर हर घर में अपनी पैठ मजबूत कर चुकी होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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