BPSC अध्यक्ष मनु भाई परमार
इतिहास के बावजूद मनु भाई परमार को नियुक्त करने का आरोप लगाया है. याचिका में कहा गया है कि बीपीएससी अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति से पहले परमार को विजिलेंस ने भ्र्ष्टाचार के मामले में आरोपी बनाया गया था. महादलित विकास मिशन के तहत ट्रेनिंग और सुविधाएं देने के नाम पर हुए स्कैम में विजिलेंस विभाग ने केस दर्ज किया था. महादलितों के विकास के लिए सरकार ने 2007 में मिशन का गठन किया था पर इसने 2010 से काम शुरू किया. मिशन ने श्रीराम न्यू हॉरिजन और IIIM को टेंडर किया था.
सरकार ने मुकदमा चलाने से किया इनकार
लेकिन सरकार ने उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. समंवयक पद पर कार्यरत शशि भूषण सिंह नामक गवाह ने अपने बयान में कहा है कि बिहार महादलि विकास मिशन में महादलित छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर प्रशिक्षण देना था, जिसके लिए श्री राम हॉरिजन नामक एनजीओ को निविदा के माध्यम से प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया था.
मनु भाई परमार 1992 बैच के अफसर अधिकारी है. बीपीएससी में अध्यक्ष का पद संभालने के लिए उन्होंने बीआरएस लिया था. बता दें कि आईएएस अधिकारी रवि भाई परमार भूतत्व विभाग के अपर मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे. रवि भाई मनु कला संस्कृति, एससी-एसटी कल्याण समेत कई महत्वपूर्ण विभाग में सचिव, प्रधान सचिव और अपर सचिव भी रहे है.
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-भारत एक्सप्रेस
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