7 जुलाई… भारतीय सैन्य इतिहास का वो पन्ना जो शौर्य, शहादत और अदम्य साहस की स्याही से लिखा गया है. आज कारगिल के शेरशाह, कैप्टन विक्रम बत्रा का बलिदान दिवस है. अमूमन लोग उनके प्रसिद्ध नारे ‘यह दिल मांगे मोर’ को जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों पर एक वक्त ऐसा भी आया था जब खुद पाकिस्तानी कमांडर ने वायरलेस पर कैप्टन बत्रा को धमकी दी थी? और उसके जवाब (Captain Vikram Batra in Kargil) में 24 साल के इस गबरू जवान ने जो कहा, उसने पाकिस्तानी सेना की रीढ़ तोड़ दी थी. आइए आपको ले चलते हैं 1999 के कारगिल युद्ध के उस बंकर में जहां वायरलेस पर इतिहास रचा जा रहा था.
‘पॉइंट 5140’ की चढ़ाई जहां से लिखी गई शौर्य की इबारत
कारगिल युद्ध में तोलोलिंग चोटी पर कब्जा करने के बाद भारतीय सेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी पॉइंट 5140 को दुश्मनों के चंगुल से आजाद कराना. यह द्रास सेक्टर की सबसे ऊंची चोटी थी, जहां पाकिस्तानी घुसपैठिए और उनकी सेना के जवान बेहद मजबूत बंकर बनाकर रणनीतिक रूप से फायदे में बैठे थे. वे ऊंचाई पर थे और भारतीय जांबाज नीचे से सीधी खड़ी चढ़ाई चढ़ रहे थे.
इस बेहद खतरनाक और नामुमकिन से दिखने वाले मिशन की कमान 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा को सौंपी गई थी. कैप्टन बत्रा को सेना के वायरलेस नेटवर्क पर कोडनेम दिया गया था ‘शेरशाह’. वे अपने जांबाजों के साथ रात के अंधेरे में बिना कोई आवाज किए सीधी खड़ी चट्टान पर रेंगते हुए ऊपर बढ़ रहे थे.
पाकिस्तान ने वॉकी-टॉकी पर ऐसा ऐलान क्यों किया?
जैसे ही पाकिस्तानी सेना को भनक लगी कि नीचे से भारतीय जवान चुपके से ऊपर की तरफ आ रहे हैं, तो उनके कमांडर के होश उड़ गए. पाकिस्तानी सेना अच्छी तरह जानती थी कि अगर ‘शेरशाह’ यानी कैप्टन विक्रम बत्रा (Captain Vikram Batra in Kargil) ऊपर तक पहुंच गए, तो उन्हें वहां से खदेड़ना नामुमकिन हो जाएगा.
विक्रम बत्रा के खौफ और अपनी पोजीशन खोने के डर से बौखलाए पाकिस्तानी कमांडर ने अचानक भारतीय सेना की वायरलेस फ्रीक्वेंसी को इंटरसेप्ट किया. उसने वॉकी-टॉकी पर बेहद घमंड और गीदड़भभकी भरे लहजे में सीधे कैप्टन बत्रा को चुनौती देते हुए कहा, ‘ऊपर मत आना शेरशाह, वरना मौत मिलेगी’. पाकिस्तानियों को लगा था कि मौत की यह धमकी सुनकर भारतीय जवान अपनी चढ़ाई रोक देंगे और पीछे हट जाएंगे.
कैप्टन बत्रा का वो ऐतिहासिक जवाब(Captain Vikram Batra in Kargil)
पाकिस्तानी कमांडर की इस कायराना धमकी को सुनकर 24 साल के गबरू जवान कैप्टन विक्रम बत्रा के चेहरे पर डर की जगह एक तीखी मुस्कान आ गई. उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपने वॉकी-टॉकी का बटन दबाया और दुश्मन के कमांडर को उसकी औकात याद दिलाते हुए कड़क आवाज में जवाब दिया. कैप्टन बत्रा ने कहा कि ‘अरे ओए, ज्यादा मत बोल, बस एक घंटे में देख कि चोटियां किसके पास रहती हैं.’ कैप्टन बत्रा का यह करारा जवाब सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि साक्षात काल का बुलावा था जिसने पाकिस्तानी बंकरों में बैठे दुश्मनों की रूह कंपा दी. इसके बाद शेरशाह ने अपने जवानों को ‘दुर्गा माता की जय’ का नारा लगाने का आदेश दिया.
क्या हुआ था उस 1 घंटे के भीतर?
वायरलेस पर मिली उस धमकी और कैप्टन बत्रा के जवाब (Captain Vikram Batra in Kargil) के ठीक बाद वो ऐतिहासिक एक घंटा शुरू हुआ, जिसने कारगिल युद्ध का रुख हमेशा के लिए बदल दिया. कैप्टन बत्रा और उनके जांबाज चीते की रफ्तार से दुश्मन के बंकरों पर टूट पड़े. आमने-सामने की भीषण लड़ाई शुरू हो चुकी थी. बर्फीली पहाड़ियों पर गोलियों की गड़गड़ाहट और हथगोलों के धमाकों के बीच कैप्टन बत्रा ने खुद आगे बढ़कर दो पाकिस्तानी बंकरों को पूरी तरह तबाह कर दिया.
उन्होंने आमने-सामने की हैंड-टू-हैंड फाइट में तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया. कैप्टन बत्रा के इस रौद्र रूप को देखकर पाकिस्तानी सेना अपनी चौकियां छोड़कर भागने लगी. भारतीय जांबाजों ने ठीक एक घंटे के भीतर पॉइंट 5140 पर तिरंगा लहरा दिया और वायरलेस पर मैसेज भेजा, ‘यह दिल मांगे मोर’.
-भारत एक्सप्रेस
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