भारत में अपराधियों की अवैध संपत्तियों की पहचान और वसूली के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. इंटरपोल ने ‘सिल्वर नोटिस’ नाम की एक नई प्रणाली लॉन्च की है, और भारत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इसका इस्तेमाल करते हुए देश का पहला सिल्वर नोटिस प्रकाशित किया है.
क्या है सिल्वर नोटिस?
सिल्वर नोटिस इंटरपोल का एक नया नोटिस है, जो सदस्य देशों को वांछित अपराधियों की संपत्तियों की जानकारी साझा करने और उसे ट्रैक करने में मदद करता है. इसके माध्यम से सदस्य देश धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी मांग सकते हैं. इसमें अचल संपत्तियों, वाहनों, बैंक खातों और व्यवसायों को ट्रैक करना आसान हो जाता है.
भारत ने क्यों किया सिल्वर नोटिस का इस्तेमाल?
CBI ने 23 मई 2025 को पहली बार सिल्वर नोटिस जारी किया. यह नोटिस नई दिल्ली स्थित एक विदेशी दूतावास के तत्कालीन कार्मिक शौकीन शुभम के खिलाफ है, जो वीज़ा घोटाले में आरोपी है. वह 2019 से 2022 के बीच 15 से 45 लाख रुपये तक की रिश्वत लेकर वीज़ा दिलवाने का गोरखधंधा करता था और दुबई में अवैध रूप से 15 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बना चुका है.
दूसरा सिल्वर नोटिस 26 मई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुरोध पर अमित मदनलाल लखनपाल के खिलाफ जारी किया गया. उसने भारत में अवैध रूप से एक क्रिप्टोकरेंसी ‘MTC’ लॉन्च की और 113 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की. इस सिल्वर नोटिस का उद्देश्य उसकी अवैध संपत्तियों की पहचान और वसूली है.
कितने देश शामिल हैं?
फिलहाल, सिल्वर नोटिस को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 51 देशों में लागू किया गया है, जो नवंबर 2025 तक चलेगा. प्रत्येक देश को 9 सिल्वर नोटिस जारी करने की अनुमति दी गई है.
भारत द्वारा जारी किए गए ये सिल्वर नोटिस न केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती देंगे, बल्कि अपराधियों की अवैध संपत्तियों की निगरानी और जब्ती में भी बड़ी मदद करेंगे. यह कदम यह दर्शाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अपराधों के खिलाफ और अधिक सख्ती से कार्रवाई कर रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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