सांकेतिक तस्वीर.
सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह किया कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और 16 अन्य को बरी किए जाने के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए या तो कोई तारीख तय करें या सुनवाई के लिए इसे किसी अन्य तिथि तक के लिए टाल दिया जाए. जस्टिस विकास महाजन ने सीबीआई की और से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन के आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च तय कर दी.
डीएमके सांसद को ईडी ने किया बरी
सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 21 दिसंबर, 2017 को यूपीए काल के पूर्व दूरसंचार मंत्री राजा, जो अब नीलगिरी से सांसद हैं, डीएमके सांसद कनिमोझी और अन्य को कथित घोटाले से जुड़े सीबीआई और ईडी मामलों में बरी कर दिया था. सीबीआई ने दावा किया कि 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम के लिए लाइसेंस आवंटन में कट-ऑफ तिथि को आगे बढ़ाने के बाद पहले आओ पहले पाओ के आधार पर सरकारी खजाने को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसे बाद में शीर्ष अदालत ने 2 फरवरी, 2012 को रद्द कर दिया.
20 मार्च, 2018 को सीबीआई ने बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया.
22 मार्च, 2024 को उच्च न्यायालय ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कुछ विरोधाभास हैं, जिनकी गहन जांच की आवश्यकता है.
सीबीआई मामले में राजा, कनिमोझी और 15 अन्य पर आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, नकली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने, आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने, लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार और रिश्वत लेने के अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया था.
राजा और कनिमोझी के अलावा विशेष अदालत ने पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के तीन शीर्ष अधिकारियों गौतम दोशी, सुरेंद्र पिपारा और हरि नायर को सीबीआई मामले में बरी कर दिया था.
-भारत एक्सप्रेस
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