केंद्र सरकार (Central Government) अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) प्रणाली में बदलाव लाने की योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को अनुचित मूल्य वृद्धि से बचाना है. एक रिपोर्ट के अनुसार यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है और केंद्रीय उपभोक्ता मामलों का विभाग विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत कर रहा है. कुछ लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को इस मुद्दे पर कर्मचारी, ग्राहक, शेयरधारक, आपूर्तिकर्ता और समुदाय के साथ मिलकर कुछ मुद्दों पर बातचीत करना चाहिए. वहीं अन्य लोगों का मानना है कि इस प्रकार के फैसले से अधिकतम खुदरा मूल्य की आजादी में की छूट मिल सकती है.
MRP प्रणाली क्यों अहम है?
अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) प्रणाली की शुरुआत प्री-लिबरलाइजेशन (Pre-Liberalization) दौर में हुई थी ताकि खुदरा विक्रेताओं (Retailers) द्वारा उपभोक्ताओं से अधिक शुल्क लेने की प्रवृत्ति को रोका जा सके. यह मूल्य उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा और व्यापारिक व्यवहारों पर निगरानी रखने के मकसद से तय किया जाता है.
सरकार क्या बदलाव चाहती है?
सूत्रों के अनुसार सरकार का उद्देश्य कीमतों को नियंत्रित करना नहीं बल्कि लागत (Cost), लाभ (Benefit) और अन्य शुल्कों (Other Charges) को ध्यान में रखते हुए मूल्य निर्धारण को उचित बनाना है. साथ ही अनुचित व्यापारिक प्रथाओं पर रोक लगाना भी इसका हिस्सा है. लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 के तहत सरकार को यह अधिकार भी प्राप्त है.
स्टेकहोल्डर्स की प्रतिक्रिया
16 मई को हुई बैठक में उद्योग अधिकारियों (Industry Officials) ने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के प्रति अपनी असहमति जताई है, फिर भी सरकार (Government) ने उद्योग संगठनों (Industry Organizations) और उपभोक्ता समूहों (Consumer Groups) से मूल्य निर्धारण सुधारों (Pricing reform) के लिए सुझाव मांगे हैं.
कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी?
फिलहाल यह कहना मुश्किल है. नए फॉर्मूले के आधार पर कीमतें मौजूदा दरों से कम या अधिक हो सकती हैं. इसलिए उपभोक्ताओं (Consumer) को स्पष्टता के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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