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राम मंदिर के आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा को पद्मश्री सम्मान, इजाजत नहीं मिली तो अयोध्‍या में पैरों से ही माप ली थी जमीन

Chandrakant Sompura को राम मंदिर के निर्माण में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान मिला. उनका संघर्ष और समर्पण राम मंदिर के निर्माण की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

chandrakant sompura

राम मंदिर के निर्माण में योगदान के लिए चंद्रकांत सोमपुरा पद्मश्री से सम्मानित किए गए.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

पद्म पुरस्कार पाने वालों में राम मंदिर को आकार देने वाली शख्सियत का नाम भी शामिल है. मंदिर के प्रमुख आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा. सोमपुरा ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए गर्व का पल है, क्योंकि 50 साल पहले उनके दादा को भी सोमनाथ मंदिर बनाने के लिए सम्मानित किया गया था.

चंद्रकांत ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे राम मंदिर के निर्माण के लिए सम्मानित किया जा रहा है. उन्होंने उस समय को याद किया जब वह राम मंदिर की भूमि का निरीक्षण करने गए थे. उस समय भूमि का नाप लेने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी जमीन के नाप को पैरों से माप लिया था.

उन्होंने यह बताया कि उस समय अशोक सिंघल ने उन्हें राम मंदिर का डिजाइन तैयार करने के लिए कहा था. कुंभ मेला भी उस समय चल रहा था, और राम मंदिर का मॉडल वहां प्रदर्शित किया गया था. अब इतने वर्षों बाद उन्हें राम मंदिर के लिए सम्मानित किया जा रहा है और इसके लिए उन्हें गर्व महसूस होता है.

वहीं, उन्होंने खुद को पुरस्कृत किए जाने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सच में मेरे लिए गर्व का पल है. मेरे परिवार में यह दूसरा ऐसा पुरस्कार है. इससे पहले मेरे दादाजी को 1974 में सोमनाथ मंदिर बनाने के लिए पद्मश्री पुरस्कार के रूप में मिला था. अब 50 साल बाद मुझे यह सम्मान मिला है, जो बहुत बड़ी बात है. मैं राम मंदिर के निर्माण से इतने सालों तक जुड़ा रहा और इस काम में मेरा संघर्ष लगभग 40 साल पुराना है. जब मैंने इस काम की शुरुआत की थी, तो राम मंदिर के निर्माण को लेकर कई लोग संकोच कर रहे थे, लेकिन मैंने यह काम करके दिखाया.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राम मंदिर के निर्माण का काम एक बहुत बड़ी चुनौती थी और मैं भी इसमें शामिल हुआ. जब मैंने शुरू किया, तो मुझे एक अच्छा मार्गदर्शन मिला और इस पूरी यात्रा में मेरे साथ बहुत से लोग जुड़े. मैंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए एक नक्शा तैयार किया और लकड़ी का मॉडल बनवाया. यह मॉडल देखकर संत समाज ने निश्चय किया कि मंदिर का निर्माण इसी डिजाइन के आधार पर होगा.

उन्होंने कहा कि मैंने मंदिर को बड़ा और सुंदर बनाने की कोशिश की. इसके साथ ही मंदिर के कॉरिडोर का निर्माण भी किया जा रहा है.



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